Mother of Thalassemia: रुपाली सिंघाई की प्रेरक सेवा गाथा

Mother of Thalassemia: रुपाली सिंघाई की प्रेरक सेवा गाथा

मध्य प्रदेश के हरे-भरे जंगलों, पहाड़ियों और आदिवासी संस्कृति से समृद्ध शहडोल जिला अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है। लेकिन इस सुंदरता के पीछे एक गंभीर स्वास्थ्य चुनौती भी छिपी हुई है। यहां सिकल सेल एनीमिया और थैलेसीमिया जैसे आनुवंशिक रक्त विकार सैकड़ों परिवारों को पीड़ा दे रहे हैं। इन बीमारियों से प्रभावित बच्चे जन्म से ही जीवन की कठिन लड़ाई लड़ रहे हैं। उनके शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी होती है, जिसके कारण हर पंद्रह से बीस दिनों में रक्त चढ़ाना अनिवार्य हो जाता है।

यह सभी बच्चे जिला अस्पताल शहडोल के ब्लड बैंक पर निर्भर हो कर अक्सर रक्त की कमी का सामना करते हैं। दूरदराज के गांवों से आने वाले माता-पिता के लिए यह स्थिति और भी दयनीय होती है जब आर्थिक तंगी, लंबी यात्रा, जानकारी की कमी और कभी-कभी ब्लड बैंक में रक्त का अभाव होने की वजह से इस बीमारी से जूझते बच्चों की मासूमियत खो देता हैं। उस समय उनके माता-पिता की आँखों में बस एक ही सवाल रहता है। “क्या आज रक्त मिल जाएगा? क्या मेरा बच्चा कल सुबह उठ पाएगा?

इसी चुनौतीपूर्ण परिदृश्य के साथ पिछले दस वर्षों से एक कोमल, ममतामयी और अथक महिला आशा की किरण बनकर टूटती सांसों का सहारा बनाती हैं। नाम है – श्रीमती रुपाली सिंघई। उन्हें शहडोल के थैलेसीमिया और सिकल सेल पीड़ित बच्चे स्नेह से “Mother of Thalassemia” या “थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों की माँ” कहकर पुकारते हैं। उनका एकमात्र संकल्प है। “दूरदराज के किसी भी गांव से आने वाला कोई भी बच्चा रक्त की कमी के कारण पीड़ा न सहे और न अपनी जान गवाएं।

दिशा वेलफेयर एसोसिएशन: सेवा का मजबूत आधार

रुपाली सिंघई दिशा वेलफेयर एसोसिएशन की सक्रिय उपाध्यक्ष हैं। संगठन के माध्यम से उन्होंने व्यवस्थित और सशक्त अभियान चलाया है। अब तक उन्होंने 210+ से अधिक रक्तदान शिविर आयोजित किए हैं, जिनमें लगभग 5010 यूनिट रक्त एकत्रित किया गया है। यह रक्त सीधे पीड़ित बच्चों तक पहुंचाया जाता है और सैकड़ों जीवन बचाने में सहायक सिद्ध हुआ है।

रुपाली जी खुद 37 बार रक्तदान कर चुकी हैं। जिसमें 33 बार संपूर्ण रक्तदान और 4 बार एकल दाता प्लेटलेट दान शामिल है। हर बार जब वे रक्तदान करती हैं, तो उनके मन में एक ही भावना होती है। किसी असहाय का सहारा बनना।उनका यह व्यक्तिगत योगदान पूरे शहडोल के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गया है।

यह सेवा भावना उनके पूरे परिवार में व्याप्त है। उनके पति डॉ. नितिन सिंघई ने नौ बार रक्तदान कर चुके है। इनके बेटे मौलिक सिंघई  भी अपने  जीवन मे 17 से अधिक बार रक्तदान कर युवाओं के बीच एक सकारात्मक संदेश फैलाया है। पूरा परिवार मिलकर इन बच्चों के लिए समर्पित है। डॉ. नितिन और मौलिक दोनों ही नियमित रूप से शिविरों में सक्रिय रहते हैं और समाज को प्रेरित करते हैं।

थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों के लिए समर्पित प्रयास

रुपाली सिंघई ने केवल रक्त की व्यवस्था ही नहीं की, बल्कि बच्चों को समग्र सहायता प्रदान की है। उन्होंने UDID कार्ड बनवाने में सक्रिय भूमिका निभाई, जिससे बच्चों को दिव्यांगता प्रमाणपत्र के आधार पर विभिन्न सरकारी सुविधाएं मिल रही है। उनके प्रयासों से 329 बच्चों को मासिक पेंशन प्राप्त हो रही है और 123 बच्चों को बस किराए में छूट मिली है, ताकि वे नियमित ट्रांसफ्यूजन के लिए अस्पताल आसानी से पहुंच सकें।

स्थायी उपचार की दिशा में भी उन्होंने महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। बोन मैरो ट्रांसप्लांट, HLA टेस्ट और थैला पंप जैसे उपचारों में निरंतर सहयोग दे रही हैं।

  • 30 मार्च 2025 को आयोजित निःशुल्क HLA कैंप में ग्यारह जिलों के बच्चों ने भाग लिया। इस शिविर में चार बच्चों का HLA उनकी सगी बहनों से मैच हुआ, जिससे बोन मैरो ट्रांसप्लांट की राह खुली और वे स्वस्थ जीवन की ओर बढ़ सके।
  • 8 मार्च 2026 को कटनी में आयोजित फ्री HLA कैंप ने भी कई परिवारों को नई उम्मीद प्रदान की।

बढ़ी हुई प्लीहा (Spleen) की समस्या वाले बच्चों के लिए स्प्लेनक्टॉमी सर्जरी में सरकारी सहायता दिलाने और डॉक्टरों-परिवारों के बीच समन्वय स्थापित करने में भी रुपाली जी ने अहम भूमिका निभाई है। वे हर बच्चे के साथ व्यक्तिगत रूप से जुड़ती हैं, उनके दर्द को समझती हैं और माँ की तरह उनका हौसला बढ़ाती हैं।

जागरूकता, शिक्षा और सामाजिक परिवर्तन

रुपाली सिंघई मानती हैं कि इलाज से ज्यादा जरूरी है रोकथाम। इसलिए उन्होंने स्कूलों और कॉलेजों में 115 से अधिक जागरूकता सत्र आयोजित किए। इन सत्रों में विवाह पूर्व जांच, प्रारंभिक गर्भावस्था जांच और आनुवंशिक बीमारियों से बचाव के महत्व पर विस्तार से परामर्श दिया जाता है। वे भावुक होकर युवाओं से कहती हैं की “एक छोटी सी जांच आपकी आने वाली पीढ़ी को इस आजीवन पीड़ा से बचा सकती है।”

उन्होंने 45 से अधिक स्त्री रोग विशेषज्ञों के साथ मिलकर HPLC टेस्ट को अनिवार्य बनाने की पहल की। विवाह योग्य युवक-युवतियों को विशेष परामर्श दिया जाता है ताकि भविष्य में ऐसे मामलों को रोका जा सके।

रुपाली सिंघई एक प्रभावशाली मोटिवेशनल स्पीकर के रूप में भी पहचानी जाती हैं। उन्होंने FBDOI और ISBTI और अन्य चिकित्सकीय कॉन्फ्रेंस में भाग लेती है। जहां यह शहडोल जैसे आदिवासी क्षेत्रों की चुनौतियों को राष्ट्रीय मंच पर रखती हैं और साथ मे नवीन जानकारियां सीखकर वे इन्हें स्थानीय बच्चों और परिजनों तक पहुंचाती हैं।

उनकी सबसे अनोखी पहल है — “रक्त भाई-बहन” की अवधारणा। इसमें स्वयंसेवियों का नेटवर्क तैयार किया गया है जो आपात स्थिति में तुरंत रक्तदान के लिए तैयार रहते हैं। इस पहल ने कई बच्चों की जान बचाई है और निरंतर सुरक्षित रक्त उपलब्धता सुनिश्चित की है।

सम्मान और स्नेहपूर्ण उपाधि

अपने ममतामयी व्यवहार, अथक सेवा और बच्चों के प्रति असीम प्यार के कारण थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों ने उन्हें स्नेहपूर्वक “Mother of Thalassemia” या “थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों की माँ” की उपाधि दी है। बच्चे उन्हें अपनी असली माँ  की तरह ही स्नेह करते हैं। जब कोई बच्चा दर्द से तड़पता है, तो रुपाली जी उसके सिर पर हाथ फेरती हैं और कहती है “बेटा, माँ यहाँ है। सब ठीक हो जाएगा।”

मध्य प्रदेश शासन ने उनके अतुलनीय कार्यों को मान्यता देते हुए राज्य के प्रत्येक जिले के ब्लड बैंकों में उनकी फोटो सहित ब्रांड एम्बेसडर बैनर और पोस्टर लगवाए हैं। इन बैनरों का उद्देश्य है कि लोग उनसे प्रेरणा लेकर स्वेच्छा से रक्तदान करें और इस प्रेरक सेवा को जीवन का संस्कार बनाये।

ज्ञान, जागरूकता और आशा का सफर

रुपाली सिंघई ने केवल रक्त की व्यवस्था ही नहीं की, बल्कि ज्ञान, जागरूकता, उपचार और अटूट आशा के माध्यम से हाशिए पर बसे आदिवासी परिवारों को मुख्यधारा से जोड़ा है। उन्होंने साबित किया है कि एक व्यक्ति का संकल्प पूरे समाज को बदल सकता है।

आज शहडोल में रक्तदान का संस्कार बढ़ रहा है। युवा स्वेच्छा से आगे आ रहे हैं। परिवार विवाह-पूर्व जांच को गंभीरता से ले रहे हैं। बच्चे जो कभी कमजोर और उदास रहते थे, अब स्कूल जा रहे हैं, हँस रहे हैं और सपने देख रहे हैं।

रुपाली सिंघई का यह सफर हमें सिखाता है कि सच्ची सेवा में कोई स्वार्थ नहीं होता। जब दिल से काम किया जाए, तो कोई चुनौती असंभव नहीं रहती। वे न केवल शहडोल की माँ हैं, बल्कि पूरे मानव समाज के लिए प्रेरणा स्तंभ हैं।

आइए, हम सब मिलकर उनके संकल्प को अपना संकल्प बनाएँ। रक्तदान करें, जागरूक बनें और एक थैलेसीमिया-मुक्त, स्वस्थ समाज का निर्माण करें।

रुपाली सिंघई — आपकी ममता अमर है। आपकी सेवा अनंत है। आप “Mother of Thalassemia” नहीं, बल्कि मानवता की माँ हैं।

 

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