बदलते समय में सेवा की पुकार
आज का समय अभूतपूर्व बदलावों का दौर है। विज्ञान, तकनीक और आधुनिक सुविधाओं ने जीवन को तेज़, सुविधाजनक और आसान बना दिया है। लेकिन इसके साथ ही एक खामोश कमी भी बढ़ रही है—संवेदनशीलता की कमी।
लोग पहले की तुलना में अधिक जुड़े हुए दिखाई देते हैं, लेकिन दिलों के बीच दूरी बढ़ती जा रही है। मोबाइल और इंटरनेट ने संपर्क तो बढ़ाया है, पर वास्तविक जुड़ाव कहीं न कहीं कमजोर पड़ा है। ऐसे समय में सेवा केवल एक आदर्श नहीं रही, बल्कि सामाजिक संतुलन बनाए रखने का मजबूत आधार बन चुकी है।
इस लेख में क्या है
Toggleपहले समाज परिवार और आपसी सहयोग पर आधारित होता था। गांवों में कोई भी व्यक्ति संकट में होता, तो पूरा समुदाय उसके साथ खड़ा हो जाता था। आज वही भावना धीरे-धीरे कम होती दिखाई दे रही है। प्रतिस्पर्धा और व्यक्तिगत सफलता की दौड़ में इंसान इतना उलझ गया है कि दूसरों के दुख-दर्द के लिए समय निकालना कठिन हो गया है। यही स्थिति बताती है कि सेवा की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक बढ़ चुकी है।
सेवा केवल दान या सहायता तक सीमित नहीं है। यह एक सोच है—दूसरों के प्रति जिम्मेदारी महसूस करने की सोच। यह वह भावना है, जो किसी अनजान व्यक्ति के कष्ट को देखकर भी मन को विचलित कर देती है और सहायता के लिए प्रेरित करती है। जब कोई व्यक्ति बिना स्वार्थ के मदद करता है, तो वह केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरे समाज का उत्थान करता है।
आज के समय में सेवा इसलिए भी आवश्यक है, क्योंकि समाज में असमानता, तनाव और अकेलापन तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में एक छोटा-सा सहयोग भी किसी के जीवन में बड़ी उम्मीद जगा सकता है। सेवा हमें यह याद दिलाती है कि हम केवल अपने लिए नहीं, बल्कि एक बड़े सामाजिक ताने-बाने का हिस्सा हैं।
यही कारण है कि बदलते इस युग में सेवा की पुकार पहले से कहीं अधिक स्पष्ट और आवश्यक हो गई है।
मानवता को जीवित रखने के लिए सेवा जरूरी है
मानवता केवल एक शब्द नहीं, बल्कि वह आधार है जिस पर एक सभ्य समाज खड़ा होता है। जब इंसान अपने स्वार्थ से ऊपर उठकर दूसरे के दुख को महसूस करता है और उसकी मदद के लिए आगे आता है, तभी सच्चे अर्थों में मानवता जीवित रहती है। यदि यह भावना समाप्त हो जाए, तो समाज केवल लोगों का समूह बनकर रह जाता है, जिसमें अपनापन और संवेदना का स्थान नहीं रहता।
आज के समय में हम अक्सर देखते हैं कि लोग अपने-अपने जीवन में इतने व्यस्त हैं कि आसपास हो रही घटनाओं पर ध्यान ही नहीं देते। सड़क पर कोई घायल पड़ा हो, कोई गरीब मदद की उम्मीद में खड़ा हो, या कोई बुजुर्ग अकेलेपन से जूझ रहा हो ऐसे दृश्य आम होते जा रहे हैं। यह स्थिति इस बात का संकेत है कि मानवता की भावना कमजोर पड़ रही है, और यही वह जगह है जहां सेवा की आवश्यकता सामने आती है।
सेवा हमें यह सिखाती है कि हम केवल अपने लिए नहीं, बल्कि दूसरों के लिए भी जिम्मेदार हैं। जब कोई व्यक्ति बिना किसी पहचान या अपेक्षा के किसी की सहायता करता है, तो वह एक सकारात्मक उदाहरण प्रस्तुत करता है। यह उदाहरण दूसरों को भी प्रेरित करता है, जिससे समाज में एक श्रृंखला बनती है एक व्यक्ति की सेवा कई लोगों के भीतर सेवा की भावना जगा देती है।
मानवता को जीवित रखने के लिए जरूरी है कि हम छोटी-छोटी बातों से शुरुआत करें। एक जरूरतमंद को सहारा देना, किसी परेशान व्यक्ति की बात सुनना, या किसी संकटग्रस्त परिवार की मदद करना ये सभी कार्य मिलकर समाज में विश्वास और करुणा को मजबूत करते हैं।
अंततः, सेवा ही वह शक्ति है जो इंसान को इंसान से जोड़ती है और मानवता को जीवित बनाए रखती है।
मानवता को जीवित रखने के लिए सेवा जरूरी है
मानवता केवल एक शब्द नहीं है, बल्कि वह आधार है जिस पर एक सभ्य समाज खड़ा होता है। जब इंसान अपने स्वार्थ से ऊपर उठकर दूसरों के दुख को महसूस करता है और उनकी सहायता के लिए आगे आता है, तभी सच्चे अर्थों में मानवता जीवित रहती है।
यदि यह भावना समाप्त हो जाए, तो समाज केवल लोगों का एक समूह बनकर रह जाता है, जिसमें अपनापन और संवेदना के लिए कोई स्थान नहीं बचता।
आज के समय में हम अक्सर देखते हैं कि लोग अपने जीवन में इतने व्यस्त हो गए हैं कि आसपास की परिस्थितियों पर ध्यान ही नहीं देते। सड़क पर कोई घायल पड़ा हो, कोई जरूरतमंद मदद की प्रतीक्षा कर रहा हो, या कोई बुजुर्ग अकेलेपन से जूझ रहा हो—ऐसे दृश्य अब सामान्य होते जा रहे हैं।
यह स्थिति इस बात का संकेत है कि मानवता की भावना कमजोर पड़ रही है। यहीं से सेवा की आवश्यकता स्पष्ट रूप से सामने आती है।
सेवा हमें यह सिखाती है कि हम केवल अपने लिए नहीं, बल्कि दूसरों के लिए भी जिम्मेदार हैं। जब कोई व्यक्ति बिना किसी पहचान या अपेक्षा के किसी की मदद करता है, तो वह एक सकारात्मक उदाहरण प्रस्तुत करता है।
यह उदाहरण दूसरों को भी प्रेरित करता है। धीरे-धीरे एक श्रृंखला बनती है, और एक व्यक्ति की सेवा कई लोगों के भीतर सेवा की भावना जगा देती है।
मानवता को जीवित रखने के लिए जरूरी है कि हम छोटी-छोटी बातों से शुरुआत करें। किसी जरूरतमंद को सहारा देना, किसी परेशान व्यक्ति की बात सुनना, या किसी संकटग्रस्त परिवार की मदद करना—ये सभी कार्य समाज में विश्वास और करुणा को मजबूत करते हैं।
अंततः, सेवा ही वह शक्ति है जो इंसान को इंसान से जोड़ती है और मानवता को जीवित बनाए रखती है।
स्वार्थी जीवन से ऊपर उठने का मार्ग
आज का जीवन तेजी से बदल रहा है। इस बदलाव के बीच एक प्रवृत्ति स्पष्ट दिखाई देती है—हर व्यक्ति अपने लाभ और सुविधा को प्राथमिकता देने लगा है। यह स्वाभाविक है, लेकिन जब जीवन केवल “मैं” तक सीमित रह जाता है, तो सोच संकुचित हो जाती है।
यहीं सेवा हमें एक व्यापक दृष्टिकोण प्रदान करती है।
सेवा का मार्ग हमें यह सिखाता है कि जीवन केवल व्यक्तिगत सफलता तक सीमित नहीं है। जब हम दूसरों के लिए कुछ करते हैं, तो हमारे भीतर करुणा, सहानुभूति और त्याग जैसे गुण विकसित होते हैं। ये गुण व्यक्ति को भीतर से मजबूत बनाते हैं और उसे एक बेहतर इंसान बनने की दिशा में आगे बढ़ाते हैं।
स्वार्थ से ऊपर उठना आसान नहीं होता, लेकिन सेवा इसे संभव बनाती है। यह हमें यह एहसास कराती है कि सच्चा संतोष केवल पाने में नहीं, बल्कि देने में भी है।
जब कोई व्यक्ति बिना किसी अपेक्षा के सहायता करता है, तो वह अपने भीतर एक गहरी शांति और संतुलन का अनुभव करता है।
समाज में संतुलन बनाए रखने के लिए
हर समाज में भिन्नताएँ स्वाभाविक होती हैं। कहीं आर्थिक असमानता होती है, कहीं अवसरों की कमी, तो कहीं संसाधनों का असंतुलन।
यदि यह अंतर समय के साथ बढ़ता जाए, तो समाज में दूरी, असंतोष और तनाव पैदा होने लगता है। ऐसे में सेवा एक ऐसा माध्यम बनकर सामने आती है, जो इन असमानताओं को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
जब सक्षम व्यक्ति अपनी क्षमता के अनुसार जरूरतमंदों की सहायता करता है, तो यह केवल एक व्यक्ति की मदद नहीं होती। यह पूरे समाज में संतुलन स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होता है।
भोजन, शिक्षा, स्वास्थ्य या सहयोग—इन सभी क्षेत्रों में की गई छोटी-छोटी सेवाएं मिलकर बड़ा परिवर्तन लाती हैं।
सेवा का सबसे बड़ा प्रभाव यह है कि यह समाज के कमजोर वर्ग को सहारा देती है और उन्हें आगे बढ़ने का अवसर प्रदान करती है। जब किसी को समय पर सहायता मिलती है, तो वह अपने जीवन को फिर से संभालने की शक्ति प्राप्त करता है। इससे समाज में असमानता कम होती है और सकारात्मक वातावरण बनता है।
इसके साथ ही सेवा आपसी विश्वास को भी मजबूत करती है। जब लोग एक-दूसरे के लिए खड़े होते हैं, तो समाज में अपनापन बढ़ता है और विभाजन की भावना कम होती है।
यह संतुलन किसी नियम या कानून से नहीं, बल्कि मानवीय संवेदना से बनता है।
इस प्रकार, सेवा केवल सहायता नहीं, बल्कि समाज को स्थिर और समरस बनाए रखने की आधारशिला है।
मानसिक शांति और संतोष का असली स्रोत
आज का मनुष्य बाहरी उपलब्धियों के पीछे दौड़ रहा है—अधिक धन, बेहतर पद और सुविधाजनक जीवन। फिर भी, उसके भीतर एक खालीपन बना रहता है।
ऐसा इसलिए है, क्योंकि मानसिक शांति केवल भौतिक साधनों से प्राप्त नहीं होती। असली संतोष उस क्षण में मिलता है, जब हम किसी और के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाते हैं।
सेवा हमें इस गहरे सत्य से परिचित कराती है कि खुशी केवल पाने में नहीं, बल्कि देने में भी होती है। जब कोई व्यक्ति निस्वार्थ भाव से किसी की सहायता करता है, तो उसके भीतर एक अलग प्रकार की प्रसन्नता उत्पन्न होती है।
यह प्रसन्नता स्थायी होती है, क्योंकि इसमें किसी अपेक्षा या लाभ की भावना नहीं होती।
मानसिक तनाव, चिंता और अकेलेपन से भरे इस दौर में सेवा एक प्रभावी उपाय बन सकती है। जब हम दूसरों की समस्याओं को समझने और उन्हें हल करने का प्रयास करते हैं, तो हमारा ध्यान अपने व्यक्तिगत तनावों से हटकर एक सकारात्मक दिशा में केंद्रित होता है।
इससे मन हल्का होता है और जीवन के प्रति दृष्टिकोण भी संतुलित बनता है।
इसके अतिरिक्त, सेवा व्यक्ति के भीतर आत्मसम्मान और आत्मविश्वास को भी बढ़ाती है। यह एहसास कि हम किसी के काम आ सकते हैं, जीवन को अर्थपूर्ण बनाता है।
यही भावना व्यक्ति को भीतर से मजबूत बनाती है और उसे हर परिस्थिति में स्थिर रहने की शक्ति देती है।
अंततः, सेवा ही वह माध्यम है जो मन को शांति, जीवन को संतोष और सोच को सकारात्मक दिशा प्रदान करता है।
युवा पीढ़ी को सही दिशा देने के लिए
आज की युवा पीढ़ी ऊर्जा, क्षमता और सपनों से भरी हुई है। लेकिन यह भी सच है कि दिशा के अभाव में यही ऊर्जा भटकाव का कारण बन जाती है।
आधुनिक जीवनशैली, सोशल मीडिया का प्रभाव और गलत संगति कई युवाओं को ऐसे रास्तों पर ले जा रही है, जहाँ उनका भविष्य कमजोर पड़ सकता है। ऐसे समय में सेवा एक मजबूत मार्गदर्शक बनकर सामने आती है।
युवाओं के जीवन में सेवा का महत्व
सेवा युवाओं को केवल व्यस्त नहीं रखती, बल्कि उन्हें एक स्पष्ट उद्देश्य देती है। जब कोई युवा समाज के लिए कुछ करता है, तो उसे अपने जीवन का वास्तविक मूल्य समझ में आता है।
यह भावना उसे अनुशासन, जिम्मेदारी और संवेदनशीलता की ओर ले जाती है।
सेवा से जुड़कर युवा यह सीखते हैं कि जीवन केवल व्यक्तिगत सफलता तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के प्रति भी उनका कर्तव्य है। यही सोच उन्हें एक जागरूक और जिम्मेदार नागरिक बनाती है।
भटकाव से बचाने का सशक्त माध्यम
आज नशा, गलत आदतें और समय की बर्बादी युवाओं के सामने बड़ी चुनौतियाँ हैं। यदि उन्हें सेवा के कार्यों से जोड़ा जाए, तो उनकी ऊर्जा सकारात्मक दिशा में लगती है।
रक्तदान शिविरों में सहयोग, सामाजिक जागरूकता अभियान और जरूरतमंदों की सहायता जैसे कार्य युवाओं को गलत रास्तों से दूर रखते हैं। साथ ही, उन्हें एक बेहतर और उद्देश्यपूर्ण जीवन की ओर प्रेरित करते हैं।
राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका
एक मजबूत राष्ट्र का निर्माण तभी संभव है, जब उसकी युवा शक्ति जागरूक और सक्रिय हो। सेवा के माध्यम से युवा समाज की समस्याओं को समझते हैं और उनके समाधान में भाग लेते हैं।
यह भागीदारी उन्हें केवल दर्शक नहीं, बल्कि परिवर्तन का हिस्सा बनाती है।
अंततः, सेवा युवाओं को सही दिशा देती है और उन्हें राष्ट्र निर्माण का मजबूत आधार बनाती है।
आपातकालीन परिस्थितियों में जीवन बचाने के लिए
जीवन अनिश्चितताओं से भरा हुआ है। कब, कहाँ और किसके साथ आपात स्थिति उत्पन्न हो जाए, यह कोई नहीं जानता।
सड़क दुर्घटनाएँ, अचानक बीमारी और प्राकृतिक आपदाएँ—ऐसे कई अवसर आते हैं, जब समय पर मिली सहायता ही किसी के जीवन और मृत्यु के बीच का अंतर बन जाती है। यही वे क्षण होते हैं, जहाँ सेवा का वास्तविक महत्व स्पष्ट रूप से सामने आता है।
आपातकालीन परिस्थितियों में सेवा केवल एक सहायता नहीं होती, बल्कि एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी बन जाती है।
किसी घायल व्यक्ति को तुरंत अस्पताल पहुँचाना, जरूरत पड़ने पर रक्तदान करना या संकटग्रस्त परिवार की सहायता करना—ये सभी कार्य सीधे-सीधे जीवन बचाने से जुड़े होते हैं।
सामाजिक एकता और भाईचारे को मजबूत करने के लिए
किसी भी समाज की वास्तविक शक्ति उसकी एकता और आपसी विश्वास में होती है। जब लोग एक-दूसरे के सुख-दुख में साथ खड़े होते हैं, तभी एक मजबूत और स्वस्थ समाज का निर्माण होता है।
लेकिन आज के समय में अलग-अलग विचारधाराएँ, जाति, धर्म, भाषा और क्षेत्र के आधार पर विभाजन की प्रवृत्ति बढ़ती जा रही है। ऐसे माहौल में सेवा एक ऐसी शक्ति बनकर सामने आती है, जो इन सभी भेदभावों से ऊपर उठकर लोगों को जोड़ने का काम करती है।
सेवा का सबसे बड़ा गुण यही है कि इसमें कोई भेदभाव नहीं होता। जब कोई व्यक्ति किसी जरूरतमंद की सहायता करता है, तो वह यह नहीं देखता कि सामने वाला किस धर्म, जाति या वर्ग से है।
यही सोच समाज में समानता और भाईचारे की भावना को मजबूत बनाती है। जब लोग मिलकर सेवा कार्यों में भाग लेते हैं, तो उनके बीच आपसी समझ और विश्वास भी बढ़ता है।
सामूहिक सेवा गतिविधियाँ—जैसे रक्तदान शिविर, स्वच्छता अभियान और राहत कार्य—लोगों को एक मंच पर लाती हैं। जब अलग-अलग पृष्ठभूमि के लोग एक ही उद्देश्य के लिए साथ काम करते हैं, तो उनके बीच की दूरी अपने आप कम हो जाती है।
यह अनुभव उन्हें यह समझाता है कि इंसानियत किसी भी पहचान से बड़ी होती है।
इसके साथ ही सेवा समाज में सकारात्मक वातावरण का निर्माण करती है। जब लोग एक-दूसरे के प्रति सहानुभूति और सहयोग की भावना रखते हैं, तो तनाव और संघर्ष की संभावना कम हो जाती है।
यह वातावरण न केवल वर्तमान को बेहतर बनाता है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी एक मजबूत आधार तैयार करता है।
जीवन के असली उद्देश्य को समझने के लिए
मनुष्य का जीवन केवल जन्म, शिक्षा, रोजगार और भौतिक उपलब्धियों तक सीमित नहीं है। यदि जीवन का उद्देश्य केवल व्यक्तिगत लाभ और सुविधाओं तक सिमट जाए, तो यह अधूरा रह जाता है।
वास्तविक अर्थों में जीवन तब सार्थक बनता है, जब व्यक्ति अपने अस्तित्व को समाज और मानवता के व्यापक संदर्भ में समझता है। यही समझ सेवा के माध्यम से विकसित होती है।
सेवा व्यक्ति को यह सिखाती है कि वह केवल स्वयं के लिए नहीं, बल्कि दूसरों के लिए भी जिम्मेदार है। जब हम किसी जरूरतमंद की सहायता करते हैं, तो हमें यह एहसास होता है कि हमारे छोटे-छोटे प्रयास भी किसी के जीवन में बड़ा बदलाव ला सकते हैं।
यह अनुभव जीवन के उद्देश्य को स्पष्ट करता है और व्यक्ति को एक नई दिशा प्रदान करता है।
अक्सर लोग जीवन में सफलता प्राप्त करने के बाद भी भीतर से खालीपन महसूस करते हैं। इसका कारण यह है कि उन्होंने अपने जीवन को केवल व्यक्तिगत उपलब्धियों तक सीमित रखा होता है।
सेवा इस खालीपन को भरने का कार्य करती है, क्योंकि यह हमें दूसरों के जीवन से जोड़ती है और हमारे अस्तित्व को एक गहरे अर्थ से भर देती है।
सेवा के माध्यम से व्यक्ति अपने भीतर छिपी संवेदनशीलता, करुणा और त्याग की भावना को पहचानता है। यह प्रक्रिया उसे आत्मकेंद्रित सोच से बाहर निकालकर व्यापक दृष्टिकोण अपनाने के लिए प्रेरित करती है।
जब व्यक्ति यह समझ जाता है कि उसका जीवन केवल उसका नहीं, बल्कि समाज का भी हिस्सा है, तब वह अपने कार्यों को अधिक जिम्मेदारी और समर्पण के साथ करने लगता है।
राष्ट्र निर्माण में सेवा की भूमिका
किसी भी राष्ट्र की मजबूती केवल उसकी सरकार या नीतियों पर निर्भर नहीं होती। यह उसके नागरिकों की सोच और भागीदारी पर आधारित होती है।
जब नागरिक अपने कर्तव्यों को समझते हुए समाज के लिए आगे आते हैं, तभी एक सशक्त राष्ट्र का निर्माण संभव होता है। इस दिशा में सेवा एक महत्वपूर्ण आधार बनकर कार्य करती है।
सेवा व्यक्ति को अपने आसपास की समस्याओं को समझने और उनके समाधान में भाग लेने के लिए प्रेरित करती है।
स्वच्छता, शिक्षा, स्वास्थ्य, रक्तदान और जागरूकता जैसे कार्य केवल व्यक्तिगत प्रयास नहीं होते। ये राष्ट्र की प्रगति से सीधे जुड़े होते हैं।
जब लोग इन कार्यों में सक्रिय रूप से भाग लेते हैं, तो समाज में सकारात्मक परिवर्तन तेजी से दिखाई देता है।
इसके साथ ही सेवा नागरिकों में जिम्मेदारी और अनुशासन की भावना विकसित करती है। यह उन्हें यह समझने में मदद करती है कि देश केवल अधिकारों से नहीं, बल्कि कर्तव्यों के पालन से आगे बढ़ता है।
जब हर व्यक्ति अपने स्तर पर योगदान देता है, तो छोटी-छोटी पहल मिलकर एक बड़े परिवर्तन का रूप ले लेती हैं।
आने वाली पीढ़ियों के लिए उदाहरण बनना
आज हम जो करते हैं, वही आने वाली पीढ़ियाँ देखकर सीखती हैं। हमारे व्यवहार, हमारे निर्णय और हमारे कार्य ही उनके लिए मार्गदर्शन बनते हैं। ऐसे में यदि हम अपने जीवन में सेवा को स्थान देते हैं, तो हम केवल वर्तमान को नहीं, बल्कि भविष्य को भी बेहतर दिशा दे रहे होते हैं।
जब बच्चे अपने परिवार और समाज में सेवा की भावना को देखते हैं, तो उनके भीतर भी वही संस्कार विकसित होते हैं। वे समझते हैं कि जीवन केवल अपने लिए जीने का नाम नहीं, बल्कि दूसरों के लिए उपयोगी बनने का अवसर है। यह सीख उन्हें जिम्मेदार, संवेदनशील और जागरूक नागरिक बनने में मदद करती है।
सेवा का यह प्रभाव धीरे-धीरे एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुँचता है। एक व्यक्ति का छोटा सा प्रयास भी समाज में एक नई सोच की शुरुआत कर सकता है। जब अधिक लोग इस मार्ग को अपनाते हैं, तो यह एक मजबूत परंपरा का रूप ले लेता है।
सेवा ही सच्चा धर्म है
समय चाहे कितना भी बदल जाए, एक सत्य कभी नहीं बदलता—मानवता का आधार सेवा ही है।
आधुनिक जीवन की दौड़ में हम कई बार अपने कर्तव्यों और मूल्यों से दूर हो जाते हैं। ऐसे में सेवा हमें फिर से सही मार्ग पर लौटने का अवसर देती है। यह केवल एक कार्य नहीं, बल्कि जीवन जीने का एक सच्चा तरीका है।
सेवा हमें यह सिखाती है कि सच्ची खुशी केवल अपने लिए जीने में नहीं, बल्कि दूसरों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने में है। जब हम बिना किसी अपेक्षा के किसी की मदद करते हैं, तो हमारे भीतर गहरी संतुष्टि उत्पन्न होती है।
यही संतोष जीवन को अर्थपूर्ण बनाता है।
आज आवश्यकता इस बात की है कि हम सेवा को केवल विचार तक सीमित न रखें, बल्कि इसे अपने व्यवहार का हिस्सा बनाएं। छोटे-छोटे कदम—जैसे किसी की सहायता करना, जागरूकता फैलाना या समाज के लिए समय निकालना—भी बड़ा परिवर्तन ला सकते हैं।
अंततः, सेवा ही वह मार्ग है जो इंसान को सच्चे धर्म, सच्ची मानवता और एक सार्थक जीवन की ओर ले जाता है।
HIMRANG Awareness & Social News for a Better Society