कला और संस्कृति

पाँच प्रमुख तीर्थ (गया, ब्रह्मकपाल, सिद्धवट, हरिद्वार और वाराणसी)
पाँच प्रमुख तीर्थ (गया, ब्रह्मकपाल, सिद्धवट, हरिद्वार और वाराणसी)

“कला और संस्कृति” वह स्थान है जहाँ परंपरा और पर्शनल अनुभव मिलते हैं। यहाँ लोककला, संगीत, नृत्य, साहित्य और सांस्कृतिक अनुभवों की कहानियाँ साझा की जाती हैं। इसलिए, यह पेज हमारे जीवन की आत्मा और सामाजिक स्मृतियों को जानने तथा जिन्दा रखने का माध्यम है। साथ ही, यह आपको प्रेरित करता है कि आप अपने समुदाय की सांस्कृतिक धरोहर को सहेजें और उसे आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाएँ।

आज के दौर में सेवा क्यों जरूरी है? जानिए असली कारण

आज के दौर में सेवा क्यों जरूरी है? जानिए असली कारण

बदलते समय में सेवा की पुकार आज का समय अभूतपूर्व बदलावों का दौर है। विज्ञान, तकनीक और आधुनिक सुविधाओं ने जीवन को तेज़, सुविधाजनक और आसान बना दिया है। लेकिन इसके साथ ही एक खामोश कमी भी बढ़ रही है—संवेदनशीलता की कमी। लोग पहले की तुलना में अधिक जुड़े हुए …

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महामाया पब्लिक स्कूल, ओड्डी के वार्षिकोत्सव में “हमारे बुजुर्ग हमारी धरोहर” ने सम्मान, संस्कार और संस्कृति का प्रेरक संदेश दिया।

महामाया पब्लिक स्कूल, ओड्डी के वार्षिकोत्सव में “हमारे बुजुर्ग हमारी धरोहर” ने सम्मान, संस्कार और संस्कृति का प्रेरक संदेश दिया।

हमारे बुजुर्ग हमारी धरोहर – थीम पर सजा महामाया स्कूल का वार्षिकोत्सव कुमारसैन। महामाया पब्लिक स्कूल, लाला रत्ती राम कॉम्प्लेक्स ओड्डी में इस वर्ष का वार्षिकोत्सव समारोह केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि संस्कारों, कृतज्ञता और जीवन मूल्यों का उत्सव बन गया। विद्यालय प्रबंधन ने इस वर्ष का विषय रखा …

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कलियुग में धर्म का जीवंत स्वरूप: भगवान श्री जगन्नाथ पुरी की महिमा

कलियुग में धर्म का जीवंत स्वरूप: भगवान श्री जगन्नाथ पुरी की महिमा

कलियुग के सबसे बड़े धाम – भगवान श्री जगन्नाथ पुरी  भारत की आध्यात्मिक परंपरा सहस्राब्दियों पुरानी है। सतयुग, त्रेतायुग और द्वापरयुग के बाद जब कलियुग का आरंभ हुआ, तब मानव जीवन में भक्ति के स्वरूप में भी परिवर्तन आया। जहाँ पहले कठोर तप, यज्ञ और दीर्घ साधनाएँ आवश्यक मानी जाती …

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आध्यात्म क्या है? धर्म और अध्यात्म में मूल अंतर

आध्यात्म क्या है? धर्म और अध्यात्म में मूल अंतर

अध्यात्म क्या है? धर्म और अध्यात्म में वास्तविक अंतर की सरल व्याख्या अध्यात्म और धर्म दोनों ही मानव जीवन के महत्वपूर्ण पक्ष हैं, लेकिन उनके स्वरूप और उद्देश्य में स्पष्ट अंतर है। धर्म एक सामाजिक और सांस्कृतिक व्यवस्था है, जो मनुष्य को नैतिकता, अनुशासन और कर्तव्य का बोध कराती है। …

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कनाग माता मंदिर, ठियोग – पारम्परिक और समृद्ध देव संस्कृति का प्रतीक

हिमाचल की ऊँचाइयों पर बसा कनाग माता मंदिर – आस्था और श्रद्धा का प्रतीक।

कनाग देवी मंदिर: ठियोग की दिव्य आस्था और प्राकृतिक सौंदर्य हिमाचल प्रदेश देवभूमि के नाम से प्रसिद्ध है। यहाँ हर गाँव और हर घाटी में देवी-देवताओं का वास माना जाता है। शिमला ज़िले की ठियोग तहसील में स्थित कनाग माता मंदिर एक ऐसा ही पवित्र स्थल है। यह स्थल प्राकृतिक …

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Ganpati Bappa Morya – जानें भगवान गणेश से जुड़े अनमोल जीवन संदेश

Ganpati Bappa Morya – जानें भगवान गणेश से जुड़े अनमोल जीवन संदेश

  गणपति बप्पा का स्वरूप और नाम हिन्दू धर्म में गणेश जी को प्रथम पूज्य का स्थान प्राप्त है। किसी भी धार्मिक अनुष्ठान, यज्ञ, विवाह या पूजन का आरंभ उनकी वंदना से ही प्रारम्भ होता है। यह परंपरा केवल प्रतीकात्मक नहीं बल्कि गहन दार्शनिक, आध्यात्मिक आस्था का प्रतीक है। गणेश …

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