Read Himrang News on Google News

View on Google News
Author Bio – Naresh Sharma | Inspiring Blood Donor, Writer & Social Worker
Author Bio – Naresh Sharma | Inspiring Blood Donor, Writer & Social Worker

Author Bio

मेरी कलम से

लेखक परिचय – नरेश शर्मा

 स्वैच्छिक रक्तदाता | लेखक | राष्ट्र एवं पर्यावरण हितैषी

मेरा मानना है कि जीवन की वास्तविक सफलता केवल स्वयं के लिए जीने में नहीं, बल्कि दूसरों के जीवन में आशा, विश्वास और मुस्कान का कारण बनने में है। यही विचार मेरे जीवन, मेरी लेखनी और मेरे प्रत्येक सामाजिक कार्य की प्रेरणा है। पिछले तीन दशकों से मैं समाजसेवा, स्वैच्छिक रक्तदान, जनजागरण और मानवता की सेवा को अपना जीवनधर्म मानकर कार्य कर रहा हूँ।

हिमाचल प्रदेश के जिला शिमला के एक साधारण ग्रामीण परिवार से निकलकर मैंने कभी यह नहीं सोचा था कि सेवा का यह छोटा-सा सफर मुझे पूरे देश के हजारों लोगों से जोड़ देगा। आज ईश्वर की कृपा और समाज के स्नेह से मुझे भारत के लगभग 21–22 राज्यों में जाकर रक्तदान, समाजसेवा और जनजागरूकता अभियानों में भाग लेने तथा हजारों सेवाभावी लोगों से जुड़ने का अवसर मिला है।

पिछले वर्षों में मुझे भारत की 2000 से अधिक सामाजिक, रक्तदान एवं जनसेवा संस्थाओं के साथ कार्य करने, संवाद करने और सेवा कार्यों में सहभागी बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। देश के विभिन्न राज्यों में आयोजित सैकड़ों स्वैच्छिक रक्तदान शिविरों का हिस्सा बनकर मैंने न केवल स्वयं रक्तदान किया, बल्कि हजारों लोगों को रक्तदान के लिए प्रेरित करने का प्रयास भी किया। जब कोई नया रक्तदाता पहली बार रक्तदान करता है या किसी मरीज को समय पर रक्त मिलने से उसका जीवन बचता है, तो वही मेरे लिए सबसे बड़ा सम्मान होता है।

अब तक मुझे 128 बार स्वैच्छिक रक्तदान करने का सौभाग्य मिला है। अनेक बार आपातकालीन परिस्थितियों में प्लेटलेट्स दान भी किया है। मेरे लिए रक्तदान केवल एक सामाजिक अभियान नहीं, बल्कि मानव जीवन के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है।

मेरे सामाजिक जीवन का सबसे भावनात्मक अध्याय थैलेसीमिया से पीड़ित बच्चों के साथ जुड़ा रहा है। वर्षों तक ऐसे बच्चों और उनके परिवारों के साथ एक अभिभावक की तरह खड़े रहने, समय पर रक्त उपलब्ध कराने, रक्तदाताओं को जोड़ने और उनकी हर संभव सहायता करने का अवसर मिला। उनके संघर्ष, मुस्कान और जीवन से जुड़ी अनगिनत कहानियों ने मुझे सिखाया कि सेवा केवल दान देने का नाम नहीं, बल्कि किसी के दुख को अपना समझकर उसके साथ खड़े रहने का नाम है।

मैंने अपने जीवन को केवल वर्तमान तक सीमित नहीं रखा। मैंने नेत्रदान, देहदान और अंगदान का संकल्प लिया है, क्योंकि मेरा विश्वास है कि यदि मेरे जाने के बाद भी मेरा शरीर किसी की दृष्टि, किसी मरीज के जीवन या चिकित्सा शिक्षा के लिए उपयोगी बन सके, तो इससे बड़ा सौभाग्य कोई नहीं हो सकता।

एक लेखक के रूप में मेरी कोशिश रहती है कि मेरे शब्द केवल पढ़े न जाएँ, बल्कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन का माध्यम बनें। मैं रक्तदान, समाजसेवा, नशा मुक्ति, राष्ट्रभक्ति, पर्यावरण संरक्षण, स्वास्थ्य, शिक्षा और मानवीय मूल्यों जैसे विषयों पर नियमित रूप से लिखता हूँ। मेरे लिए लेखन केवल अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि समाज के प्रति मेरी जिम्मेदारी है।

जीवन ने मुझे देश के विभिन्न शहरों और राज्यों में रहकर काम करने और लोगों को समझने का अवसर भी दिया। शिमला, सोलन, परवाणू, चंडीगढ़, ज़ीरकपुर, जालंधर (पंजाब) तथा महाराष्ट्र के औरंगाबाद जैसे स्थानों पर प्रतिष्ठित संस्थानों में कार्य करते हुए मैंने अपनी आजीविका भी अर्जित की और साथ ही सामाजिक सेवा की यात्रा को निरंतर जारी रखा। अलग-अलग संस्कृतियों, भाषाओं और समाजों के बीच रहकर मैंने एक ही बात सीखी—मानवता की भाषा हर जगह एक जैसी होती है।

प्रकृति और पर्यावरण संरक्षण भी मेरे जीवन के महत्वपूर्ण विषय हैं। मेरा विश्वास है कि जिस पृथ्वी ने हमें जीवन दिया है, उसके संरक्षण की जिम्मेदारी भी हमारी ही है। इसलिए वृक्षारोपण, स्वच्छता, जल संरक्षण और पर्यावरण जागरूकता से जुड़े प्रयासों में सक्रिय रहना मैं अपना सामाजिक दायित्व मानता हूँ।

आज पीछे मुड़कर देखता हूँ तो महसूस करता हूँ कि रक्तदान, समाजसेवा और मानवता से जुड़ी अनगिनत कहानियाँ, हजारों लोगों का विश्वास, सैकड़ों शिविरों का अनुभव और सेवा के असंख्य पल ही मेरी सबसे बड़ी पूंजी हैं। यदि मेरे जीवन का कोई भी अनुभव, कोई लेख, कोई विचार या कोई सेवा कार्य किसी एक व्यक्ति को भी मानवता के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दे सके, तो मैं इसे अपने जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि मानूँगा।

थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों के साथ भावनात्मक रिश्ता

मेरी सेवा यात्रा का सबसे संवेदनशील अध्याय थैलेसीमिया से पीड़ित बच्चों और उनके परिवारों के साथ जुड़ा है। ऐसे बच्चों को नियमित रूप से रक्त की आवश्यकता होती है। मैंने उनके लिए रक्तदाताओं को जोड़ने, समय पर रक्त उपलब्ध कराने और हर संभव सेवा-सहयोग करने का प्रयास किया है।

इन बच्चों के साथ मेरा रिश्ता केवल एक रक्तदाता का नहीं रहा। मैंने एक पिता की तरह उनकी पीड़ा, संघर्ष और उम्मीदों को महसूस किया है। उनकी मुस्कान और जीवन के प्रति उनका साहस मुझे निरंतर सेवा के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।

“मेरे लिए रक्तदान केवल रक्त की कुछ बूंदें नहीं, बल्कि किसी अनजान व्यक्ति के जीवन में उम्मीद की नई सुबह है। सेवा मेरा कर्तव्य, लेखनी मेरा माध्यम और मानवता मेरी सबसे बड़ी पहचान है।”

यही मेरी वास्तविक पहचान है

मैं स्वयं को कोई महान व्यक्ति नहीं मानता। मैं केवल एक साधारण इंसान हूं, जिसने अपने जीवन, समय, अनुभव और लेखनी को यथासंभव मानवता के काम में लगाने का प्रयास किया है। रक्तदान और समाजसेवा की अनगिनत कहानियां, हजारों लोगों का विश्वास और सेवा के असंख्य अनुभव ही मेरी वास्तविक उपलब्धियां हैं।

यदि मेरे रक्तदान से किसी का जीवन बचा हो, मेरे प्रयास से कोई नया रक्तदाता बना हो, मेरे सहयोग से किसी थैलेसीमिया पीड़ित बच्चे के चेहरे पर मुस्कान आई हो या मेरे किसी लेख ने एक व्यक्ति को भी समाजसेवा के लिए प्रेरित किया हो, तो मैं अपने जीवन और अपनी लेखनी को सार्थक मानता हूं।