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हिमाचल के शतकवीर रक्तदाता नरेश शर्मा को राज्यपाल से सम्मान, 128 बार कर चुके हैं रक्तदान

हिमाचल के शतकवीर रक्तदाता नरेश शर्मा को राज्यपाल से सम्मान, 128 बार कर चुके हैं रक्तदान

शिमला/ठियोग।

हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले से संबंध रखने वाले शतकवीर रक्तदाता नरेश शर्मा ने एक बार फिर प्रदेश को गौरवान्वित किया है। पिछले करीब तीन दशकों से स्वैच्छिक रक्तदान और मानवता की सेवा में सक्रिय नरेश शर्मा को हिमाचल प्रदेश के महामहिम राज्यपाल श्री कविंद्र गुप्ता ने उनके निरंतर सेवा कार्यों और अब तक 128 बार रक्तदान करने की उल्लेखनीय उपलब्धि के लिए सम्मानित किया।

यह सम्मान केवल रक्तदान की संख्या का अभिनंदन नहीं है, बल्कि उस लंबे सफर की पहचान भी है जिसमें किसी जरूरतमंद की पुकार, अस्पताल में रक्त की प्रतीक्षा करते मरीज की चिंता और असहाय परिवार की उम्मीद को सबसे ऊपर रखा गया।

मझोली के छोटे से गांव से शुरू हुई सेवा की बड़ी यात्रा

Naresh Sharma Majholi Sarivan Theog Shimla

नरेश शर्मा जिला शिमला की तहसील ठियोग की ग्राम पंचायत सरिवन के छोटे से गांव मझोली के रहने वाले हैं। पहाड़ी क्षेत्र के एक सामान्य ग्रामीण परिवेश से निकली उनकी सेवा यात्रा आज हिमाचल से बाहर देश के अनेक राज्यों तक पहुंच चुकी है।

रक्तदान उनके लिए कभी किसी रिकॉर्ड को पूरा करने का माध्यम नहीं रहा। वे इसे एक ऐसी मानवीय जिम्मेदारी मानते हैं जिसमें रक्तदाता यह भी नहीं जानता कि उसका दिया रक्त किस व्यक्ति को मिलेगा। फिर भी वह विश्वास के साथ रक्त देता है कि शायद उसकी कुछ बूंदें किसी परिवार की उम्मीद बचा लें।

रक्त जाति, धर्म, भाषा या क्षेत्र नहीं पूछता। जरूरत के समय वह केवल एक इंसान को दूसरे इंसान से जोड़ता है।

128 बार रक्तदान : हर रक्तदान के पीछे किसी जीवन की उम्मीद

128 times blood donor Naresh Sharma

अब तक 128 बार रक्तदान कर चुके नरेश शर्मा का मानना है कि रक्तदान की वास्तविक सफलता संख्या में नहीं बल्कि उससे जुड़े मानवीय परिणाम में है। दुर्घटना में घायल व्यक्ति, ऑपरेशन की प्रतीक्षा में बैठा मरीज, गंभीर बीमारी से जूझता व्यक्ति या प्रसूता महिला—समय पर रक्त मिलने से किसी की पूरी जिंदगी बदल सकती है।

इसी भावना के कारण उन्होंने अपने रक्तदान को स्वयं तक सीमित नहीं रखा। रक्तदान शिविरों, सामाजिक आयोजनों और जागरूकता कार्यक्रमों में वे विशेष रूप से युवाओं को स्वैच्छिक रक्तदान के लिए प्रेरित करते रहे हैं।

थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों की पीड़ा ने सेवा संकल्प को किया और मजबूत

उनकी सेवा यात्रा का एक महत्वपूर्ण पहलू थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों के लिए जागरूकता भी है। ऐसे बच्चों को नियमित अंतराल पर रक्त की आवश्यकता पड़ सकती है। किसी माता-पिता के लिए अपने बच्चे के लिए बार-बार रक्त की व्यवस्था करना कितना कठिन और भावनात्मक अनुभव होता है, इसे केवल वही परिवार पूरी तरह समझ सकता है जो इस परिस्थिति से गुजरता है।

नरेश शर्मा लोगों से अपील करते हैं कि ऐसे बच्चों के प्रति केवल सहानुभूति व्यक्त करने तक सीमित न रहें। योग्य और स्वस्थ लोग नियमित स्वैच्छिक रक्तदान के माध्यम से वास्तविक सहयोग दें। किसी मासूम को समय पर रक्त मिल जाना उसके परिवार के लिए दुनिया की सबसे बड़ी राहत हो सकती है।

राज्यपालों, मुख्यमंत्रियों और अनेक संस्थाओं से पहले भी मिल चुका सम्मान

नरेश शर्मा के रक्तदान और सामाजिक सेवा कार्यों को इससे पहले भी अनेक प्रतिष्ठित मंचों पर सम्मान मिल चुका है। हिमाचल प्रदेश के तत्कालीन राज्यपाल विष्णु सदाशिव कोकजे ने 26 जनवरी 2004 तथा तत्कालीन राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय ने 25 फरवरी 2020 को उन्हें सम्मानित किया था।

इसी प्रकार तत्कालीन मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने 15 अप्रैल 1997 और 23 मार्च 2016 को, जबकि तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने 7 अक्टूबर 2011 को उन्हें सम्मान दिया। पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार भी वर्ष 2009 में चंडीगढ़ में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उनके सेवा कार्यों को सम्मानित कर चुके हैं।

देश के अलग-अलग राज्यों में रक्तदान के क्षेत्र में सक्रिय सरकारी और गैर-सरकारी संस्थाओं, स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े व्यक्तियों और सामाजिक संगठनों ने भी समय-समय पर उनके प्रयासों को सराहा है।

सम्मान लेने नहीं, रक्तदान के लिए लोगों को प्रेरित करने पहुंचते हैं दूसरे राज्यों में

उनकी विभिन्न राज्यों की यात्राओं का उद्देश्य केवल सम्मान प्राप्त करना नहीं होता। कई रक्तदान संस्थाएं उन्हें अपने कार्यक्रमों में अतिथि वक्ता (Guest Speaker) के रूप में आमंत्रित करती हैं। यहां वे अपने अनुभवों के आधार पर रक्तदान से जुड़े भ्रम दूर करने और नए रक्तदाताओं को इस अभियान से जोड़ने का प्रयास करते हैं।

कार्यक्रमों में आयोजक अथवा मुख्य अतिथि उनके लंबे सेवा कार्य को देखते हुए उन्हें स्मृति-चिह्न देकर सम्मानित करते हैं। लेकिन नरेश शर्मा का कहना है कि वास्तविक सम्मान तब है जब कार्यक्रम सुनने के बाद कोई युवा पहली बार रक्तदान करने का संकल्प लेकर आगे आए।

अमर उजाला हिमाचल हाई फ्लायर्स-2026 के मंच पर मिला गौरवपूर्ण सम्मान

Amar Ujala Himachal High Flyers 2026

उनकी इस यात्रा में नया अध्याय अमर उजाला हिमाचल हाई फ्लायर्स कॉफी टेबल बुक-2026 के लोकार्पण समारोह में जुड़ा। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे हिमाचल प्रदेश के महामहिम राज्यपाल श्री कविंद्र गुप्ता ने विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल करने वाले प्रदेश के 26 प्रतिष्ठित व्यक्तित्वों को सम्मानित किया।

इसी मंच पर 128 बार रक्तदान कर चुके शतकवीर रक्तदाता नरेश शर्मा को भी उनकी निरंतर रक्तदान एवं मानव सेवा के लिए सम्मान मिला। उन्होंने राज्यपाल महोदय और विशेष रूप से अमर उजाला परिवार के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे सम्मान सेवा यात्रा को नई ऊर्जा देते हैं।

कोई भी सम्मान हमारी मंजिल नहीं है। यह असहाय, पीड़ित और बीमार लोगों की सेवा के प्रति हमारी जिम्मेदारी को और बढ़ाने वाली प्रेरणा है।

अब रक्तदाताओं और उनके परिवारों की जीवन-सुरक्षा की भी उठाई आवाज

नरेश शर्मा का अगला उद्देश्य केवल स्वयं रक्तदान करते रहना नहीं है। वे लंबे समय से यह विचार भी सामने रख रहे हैं कि वर्षों तक निस्वार्थ रक्तदान करने वाले रक्तदाताओं की जीवन-सुरक्षा, सम्मान, सामाजिक सुरक्षा और उनके परिवारों के कल्याण को लेकर भी संगठित पहल होनी चाहिए।

उनका संकल्प स्वैच्छिक रक्तदान जागरूकता को बढ़ाना, थैलेसीमिया पीड़ितों की मदद करना, जरूरतमंद मरीजों के लिए रक्त उपलब्ध करवाने के प्रयासों में सहयोग देना और रक्तदाताओं के हितों की आवाज को मजबूत करना है।

सम्मान की तस्वीरें समय के साथ पुरानी हो सकती हैं
लेकिन किसी रक्तदाता के कारण बची हुई जिंदगी की धड़कन हमेशा जीवित रहती है।

🩸 रक्तदान करें   |   ❤️ जीवन बचाएं   |   🙏 मानवता को जीवंत रखें

मानवता की सेवा का यह सफर निरंतर जारी रहेगा।

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