एक रक्तदान नहीं, एक जीवन यात्रा…
02 जून 2026 | IGMC ब्लड बैंक, शिमला
हिमाचल प्रदेश की पवित्र वादियों में, जहाँ प्रकृति की गोद में करुणा, त्याग और सेवा का अमृत बहता है, वहीं एक ऐसा व्यक्तित्व भी है जिसने अपने जीवन को मानवता की सेवा के लिए समर्पित कर दिया है। शिमला जिले की तहसील ठियोग के ग्राम सरिवन (मझौली) में जन्मे समाजसेवी, लेखक, रक्तदाता एवं संकल्प सेवा के संस्थापक नरेश शर्मा ने 02 जून 2026 को इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (IGMC) शिमला के ब्लड बैंक में अपना 128वाँ स्वैच्छिक रक्तदान कर मानव सेवा की अपनी गौरवशाली यात्रा में एक और स्वर्णिम अध्याय जोड़ दिया।
यह केवल एक संख्या नहीं है, बल्कि तीन दशकों से अधिक समय से चल रही उस सेवा साधना का प्रतीक है, जिसने असंख्य लोगों को जीवनदान देने और समाज में रक्तदान के प्रति जागरूकता फैलाने का कार्य किया है।
रक्तदान से शुरू हुई जीवनभर की सेवा यात्रा
लगभग तीन दशक पहले जब नरेश शर्मा ने पहली बार रक्तदान किया था, तब उन्हें शायद यह आभास भी नहीं था कि यह छोटा-सा कदम एक दिन उनके जीवन का सबसे बड़ा मिशन बन जाएगा। उस प्रथम रक्तदान ने उन्हें मानवता की ऐसी राह पर अग्रसर किया, जहाँ उन्होंने स्वयं को समाज के पीड़ित, असहाय और जरूरतमंद लोगों की सेवा के लिए समर्पित कर दिया।
आज 128 से अधिक बार रक्तदान करने के साथ-साथ उन्होंने हजारों युवाओं और नागरिकों को रक्तदान के लिए प्रेरित किया है। उनकी प्रेरणा से अनेक लोग नियमित रक्तदाता बने हैं और जरूरतमंद मरीजों को समय पर रक्त उपलब्ध कराने में योगदान दे रहे हैं।
थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों के लिए समर्पित अभियान
नरेश शर्मा पिछले लगभग 30 वर्षों से थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों के लिए रक्तदान जागरूकता अभियान चला रहे हैं। थैलेसीमिया एक ऐसी गंभीर बीमारी है जिसमें बच्चों को नियमित अंतराल पर रक्त की आवश्यकता पड़ती है।
इस आवश्यकता को समझते हुए उन्होंने विभिन्न राज्यों में रक्तदान शिविरों का आयोजन, जागरूकता कार्यक्रमों का संचालन तथा रक्तदाताओं का नेटवर्क तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
उनका मानना है कि—“रक्तदान केवल किसी व्यक्ति को रक्त देना नहीं है, बल्कि उसके परिवार को आशा, विश्वास और जीवन प्रदान करना है।”
सेवा, संवेदना और समर्पण का पर्याय
नरेश शर्मा का जीवन सेवा, संवेदना और समर्पण का जीवंत उदाहरण है। वे केवल रक्तदान तक सीमित नहीं हैं, बल्कि समाज के विभिन्न वर्गों के लिए निरंतर कार्य करते हैं।
वे जरूरतमंद मरीजों को रक्त उपलब्ध कराने में सहयोग करते हैं, गरीब विद्यार्थियों को शैक्षणिक सामग्री प्रदान करते हैं, वृद्धजनों के बीच समय बिताकर उन्हें भावनात्मक सहारा देते हैं तथा सामाजिक जागरूकता अभियानों में सक्रिय भागीदारी निभाते हैं।
उनका उद्देश्य केवल सहायता करना नहीं, बल्कि समाज में मानवता और संवेदनशीलता की भावना को मजबूत करना है।
नशामुक्ति अभियान से युवाओं को नई दिशा
रक्तदान के साथ-साथ नरेश शर्मा नशामुक्ति जागरूकता अभियान में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। “नशा छोड़ो, राष्ट्र जोड़ो” के संदेश को लेकर उन्होंने हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ तथा अन्य राज्यों में अनेक कार्यक्रम आयोजित किए हैं।
वे युवाओं को प्रेरित करते हुए कहते हैं—जो युवा राष्ट्र निर्माण में भागीदारी निभाना चाहता है, उसे नशे से दूर रहकर अपने स्वास्थ्य, परिवार और समाज के प्रति जिम्मेदारी निभानी चाहिए।
125वें से 128वें रक्तदान तक की यात्रा
| रक्तदान | तिथि | स्थान | संस्थान |
|---|---|---|---|
| 125वाँ | 24.08.2025 | शिमला | IGMC ब्लड बैंक |
| 126वाँ | 23.11.2025 | बच्छरेटू, बिलासपुर | रक्तदान शिविर |
| 127वाँ | 28.02.2026 | उज्जैन | चरक अस्पताल |
| 128वाँ | 02.06.2026 | शिमला | IGMC ब्लड बैंक |
125वाँ रक्तदान : IGMC शिमला
24 अगस्त 2025 को नरेश शर्मा ने इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (IGMC) शिमला के ब्लड बैंक में अपना 125वाँ स्वैच्छिक रक्तदान किया।
IGMC हिमाचल प्रदेश का प्रमुख चिकित्सा संस्थान है जहाँ प्रतिदिन अनेक मरीजों को रक्त की आवश्यकता होती है। ऐसे समय में नियमित रक्तदाताओं का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाता है।
इस अवसर पर उन्होंने कहा था कि—
“रक्तदान एक ऐसा महादान है जो किसी अनजान व्यक्ति के जीवन में नई सुबह ला सकता है।”
126वाँ रक्तदान : बच्छरेटू, बिलासपुर
23 नवम्बर 2025 को बिलासपुर जिले के बच्छरेटू में आयोजित रक्तदान शिविर में उन्होंने अपना 126वाँ रक्तदान किया।
यह शिविर समाज में स्वैच्छिक रक्तदान को बढ़ावा देने तथा युवाओं को जागरूक करने के उद्देश्य से आयोजित किया गया था। इस दौरान उन्होंने उपस्थित युवाओं से अपील की कि वे अपने जन्मदिन, विवाह वर्षगांठ अथवा विशेष अवसरों को रक्तदान जैसे पुण्य कार्यों से जोड़ें।
उन्होंने कहा—
“रक्तदान करने वाला व्यक्ति किसी की जिंदगी बचाकर सच्चे अर्थों में मानवता की सेवा करता है।”
127वाँ रक्तदान : महाकाल की नगरी उज्जैन
28 फरवरी 2026 को मध्यप्रदेश की पवित्र नगरी उज्जैन में भगवान श्री महाकाल की दिव्य छत्रछाया में नरेश शर्मा ने अपना 127वाँ स्वैच्छिक रक्तदान किया।
उज्जैन स्थित चरक अस्पताल (Govt. Mother & Child Hospital, Ujjain) में आयोजित इस रक्तदान कार्यक्रम में देश के विभिन्न राज्यों से आए अनुभवी एवं शतकवीर रक्तदाताओं ने भाग लिया।
इस कार्यक्रम का उद्देश्य स्वैच्छिक रक्तदान के प्रति जनजागरूकता बढ़ाना तथा समाज में सेवा भावना को मजबूत करना था।
महाकाल की नगरी में किया गया यह रक्तदान उनके लिए एक आध्यात्मिक अनुभव भी रहा, जहाँ सेवा और श्रद्धा का सुंदर संगम देखने को मिला।
128वाँ रक्तदान : पुनः IGMC शिमला में
02 जून 2026 को नरेश शर्मा ने IGMC शिमला के ब्लड बैंक में अपना 128वाँ स्वैच्छिक रक्तदान पूर्ण किया।
यह रक्तदान केवल एक उपलब्धि नहीं, बल्कि मानवता के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता का प्रमाण है। वर्षों से नियमित रक्तदान करते हुए उन्होंने यह संदेश दिया है कि स्वस्थ व्यक्ति यदि नियमित रूप से रक्तदान करे तो देश में कभी रक्त की कमी नहीं होगी।
128वें रक्तदान के अवसर पर उन्होंने समाज से आह्वान किया—
“रक्त का कोई कारखाना नहीं होता। इसे केवल एक स्वस्थ व्यक्ति ही दान कर सकता है। इसलिए प्रत्येक सक्षम नागरिक को नियमित रक्तदान के लिए आगे आना चाहिए।”
मानवता की राह पर निरंतर अग्रसर
नरेश शर्मा केवल रक्तदाता ही नहीं, बल्कि एक प्रेरक वक्ता, समाजसेवी, लेखक और जागरूक नागरिक भी हैं। उन्होंने अपना जीवन इस विचार को समर्पित किया है कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन केवल भाषणों से नहीं, बल्कि स्वयं उदाहरण प्रस्तुत करके लाया जा सकता है।
उनकी सेवा यात्रा यह सिद्ध करती है कि यदि एक व्यक्ति संकल्प ले तो वह हजारों लोगों के जीवन में आशा का दीप जला सकता है।128 बार रक्तदान की यह उपलब्धि केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि उन सभी रक्तदाताओं के लिए प्रेरणा है जो मानवता की सेवा को अपना धर्म मानते हैं।
🩸 रक्तदान जीवनदान है, सेवा ही सच्चा सम्मान है। 🩸
महाकाल की नगरी उज्जैन में हिमाचल प्रदेश के सेंचुरियन ब्लड डोनर नरेश शर्मा का 127वां रक्तदान
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