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भारत की सर्वश्रेष्ठ महिला रक्तदाता वैशाली पंड्या को ISBTI ने कोच्चि के राष्ट्रीय मंच पर किया सम्मानित
वैशाली पंड्या को कोच्चि में ISBTI के राष्ट्रीय मंच पर A.N. Kashyap Award 2025 से सम्मानित करते हुए।

भारत की सर्वश्रेष्ठ महिला रक्तदाता वैशाली पंड्या को ISBTI ने कोच्चि के राष्ट्रीय मंच पर किया सम्मानित

कोच्चि, केरल। रक्तदान केवल रक्त देने का काम नहीं है, बल्कि किसी जरूरतमंद की जिंदगी बचाने और उसके परिवार को उम्मीद देने की सेवा है। इसी भावना के साथ वर्षों से रक्तदान करती आ रही अहमदाबाद की शतकवीर रक्तदानी वैशाली हितेश पंड्या को 18 सितंबर 2026 को कोच्चि में राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया गया। Indian Society of Blood Transfusion & Immunohaematology (ISBTI) की 51वीं Annual National Conference TRANSCON 2026 में उन्हें प्रतिष्ठित A.N. Kashyap Award–2025 प्रदान किया गया। यह सम्मान उनकी लंबे समय से चल रही रक्तदान और जनसेवा की यात्रा की बड़ी उपलब्धि है।

कोच्चि में राष्ट्रीय सम्मान—सेवा के वर्षों को मिला गौरव

वैशाली पंड्या TRANSCON 2026 कोच्चि, केरल में ISBTI राष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान।
वैशाली पंड्या TRANSCON 2026 कोच्चि, केरल में ISBTI राष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान।
🏆 147 रक्तदान • 86 SDP Donation • A.N. Kashyap Award–2025 🩸

कोच्चि के Chakolas Pavilion and Convention Centre में TRANSCON 2026 का आयोजन किया गया। यह रक्तदान और ब्लड ट्रांसफ्यूजन से जुड़ा एक बड़ा राष्ट्रीय सम्मेलन था। इसका आयोजन Department of Transfusion Medicine, Government Medical College, Thrissur द्वारा किया गया, जिसमें देश-विदेश से डॉक्टर, वैज्ञानिक, शोधकर्ता और रक्तदान के क्षेत्र में काम करने वाले लोग शामिल हुए।

इसी राष्ट्रीय मंच पर वैशाली पंड्या को प्रतिष्ठित A.N. Kashyap Award–2025 से सम्मानित किया गया। उन्हें यह सम्मान Prof. (Dr.) Mohanan Kunnummal, Vice-Chancellor, Kerala University of Health Sciences के हाथों प्रदान किया गया। यह सम्मान वैशाली पंड्या की वर्षों से जारी रक्तदान सेवा और लोगों को स्वैच्छिक रक्तदान के लिए प्रेरित करने की उनकी मेहनत की महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

A.N. Kashyap Award—रक्तदान प्रेरणा के संकल्प का सम्मान

वैशाली हितेश पंड्या को ISBTI द्वारा प्रदान किया गया प्रतिष्ठित A.N. Kashyap Award 2025 और सम्मान प्रमाणपत्र।
वैशाली हितेश पंड्या को ISBTI द्वारा प्रदान किया गया प्रतिष्ठित A.N. Kashyap Award 2025 और सम्मान प्रमाणपत्र।

ISBTI द्वारा स्थापित A.N. Kashyap Award ऐसे सामाजिक कार्यकर्ताओं को प्रदान किया जाता है, जिन्होंने स्वैच्छिक रक्तदान के क्षेत्र में लोगों को प्रेरित करने और जागरूकता बढ़ाने में उल्लेखनीय योगदान दिया हो। वैशाली पंड्या स्वयं नियमित रूप से रक्तदान करने के साथ-साथ रक्तदान शिविरों के आयोजन, जरूरतमंद मरीजों के लिए रक्तदाताओं को जोड़ने और युवाओं को स्वैच्छिक रक्तदान के लिए प्रेरित व प्रोत्साहित करने का कार्य भी निरंतर करती रही हैं। नए रक्तदाताओं का भय दूर करना, उन्हें सही जानकारी देना और रक्तदान को समाज में सेवा एवं जिम्मेदारी की संस्कृति के रूप में स्थापित करना उनकी सेवा-यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

147 रक्तदान—संवेदना, साहस और

वैशाली पंड्या ने 11 सितंबर 2026 को अपना 147वाँ रक्तदान किया।
वैशाली पंड्या ने 11 सितंबर 2026 को अपना 147वाँ रक्तदान किया।

निरंतरता की यात्रा

11 सितंबर 2026 तक वैशाली पंड्या कुल 147 बार रक्त अथवा प्लेटलेट्स दान कर चुकी हैं। इनमें 86 Single Donor Platelet (SDP) Donations और 61 Whole Blood Donations शामिल हैं। यह उपलब्धि केवल एक संख्या नहीं, बल्कि वर्षों से निभाए जा रहे सेवा-संकल्प का प्रमाण है। कैंसर और गंभीर रोगियों के लिए आवश्यक प्लेटलेट्स हो या सामान्य रक्त की जरूरत, वैशाली हर पुकार को मानवता की जिम्मेदारी मानती हैं। उनका प्रत्येक दान किसी अनजान जीवन के लिए आशा, साहस और विश्वास का संदेश बनकर पहुँचता है।

 परिवार के संस्कारों से जनसेवा के विस्तृत आकाश तक

वैशाली पंड्या की रक्तदान यात्रा के पीछे परिवार से मिली सेवा की गहरी प्रेरणा है। उनके पिता स्वयं नियमित रक्तदाता रहे और जीवन में 99 बार रक्तदान किया। उम्र की सीमा के कारण वे अपना शतक पूरा नहीं कर सके, लेकिन उनका वही अधूरा सपना वैशाली के मन में एक संकल्प बनकर जीवित रहा। पिता से मिली यह सीख कि हमारा रक्त किसी अनजान व्यक्ति के जीवन की आशा बन सकता है, वैशाली के जीवन का मार्ग बनती चली गई। आज वे 147 बार रक्त एवं प्लेटलेट्स दान कर चुकी हैं।इस सेवा-यात्रा में उनके पति डॉ. हितेश पंड्या, जो देश के प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों में भी शामिल हैं और स्वयं O Negative रक्त समूह के नियमित रक्तदाता हैं, तथा पूरे परिवार का निरंतर सहयोग वैशाली के लिए बड़ी शक्ति और प्रेरणा रहा है।

आज वैशाली केवल स्वयं रक्तदान करने तक सीमित नहीं हैं। जरूरतमंद मरीजों के लिए रक्तदाता खोजना, रक्तदान शिविर आयोजित करना, पहली बार रक्तदान करने वालों का डर दूर करना और युवाओं को स्वैच्छिक रक्तदान के लिए प्रेरित व प्रोत्साहित करना उनके जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। वे देश के विभिन्न राज्यों में रक्तदाताओं, समाजसेवियों और सामाजिक संस्थाओं से जुड़कर मानवता की इस सेवा को आगे बढ़ा रही हैं।

Mission Raktkranti Hindustan की प्रेरक स्तंभ

Mission Raktkranti Hindustan परिवार द्वारा वैशाली पंड्या को स्मृति चिन्ह भेंट करते हुए।
Mission Raktkranti Hindustan परिवार द्वारा वैशाली पंड्या को स्मृति चिन्ह भेंट करते हुए।

वैशाली पंड्या की पहचान केवल शतकवीर रक्तदानी तक सीमित नहीं है। वे सक्रिय Blood Motivator, Blood Program Coordinator और Mission Raktkranti Hindustan की प्रेरक स्तंभ के रूप में रक्तदान की राष्ट्रीय चेतना को आगे बढ़ा रही हैं। मिशन का संदेश “हर घर रक्तदाता, घर-घर रक्तदाता” उनके सेवा-संकल्प का महत्वपूर्ण आधार है। उनका प्रयास है कि भारत के प्रत्येक घर और परिवार को स्वैच्छिक रक्तदान की भावना से जोड़ा जाए, ताकि जरूरत के समय किसी मरीज को रक्त के लिए परेशान न होना पड़े। साथ ही वे थैलेसीमिया मुक्त भारत की दिशा में भी जागरूकता, नियमित रक्तदान और जनभागीदारी को बढ़ावा देने के लिए निरंतर कार्य कर रही हैं।

वे विभिन्न राज्यों के रक्तदाताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और संस्थाओं को जोड़ने, युवाओं को रक्तदान के लिए प्रेरित और प्रोत्साहित करने तथा नई पीढ़ी में सेवा की भावना जगाने का कार्य करती हैं। उनका मानना है कि रक्तदान केवल आपातकाल में याद आने वाला कार्य नहीं, बल्कि स्वस्थ और पात्र नागरिकों का नियमित सामाजिक दायित्व होना चाहिए। यही सोच उन्हें रक्तदान को एक व्यापक जनआंदोलन के रूप में आगे बढ़ाने की शक्ति देती है

सम्मान से आगे—अब जिम्मेदारी और भी बड़ी

कोच्चि में मिला यह राष्ट्रीय सम्मान वैशाली पंड्या की लंबी सेवा-यात्रा का गौरवपूर्ण अध्याय है। A.N. Kashyap Award–2025 ने उनके निरंतर रक्तदान, जनजागरण और समाज को जोड़ने वाले प्रयासों को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान दिया है। यह उपलब्धि उन्हें रुकने के लिए नहीं, बल्कि और अधिक लोगों तक स्वैच्छिक रक्तदान का संदेश पहुँचाने की नई ऊर्जा देती है।

वैशाली की यात्रा हमें सिखाती है कि बदलाव हमेशा बड़े मंचों से शुरू नहीं होता। कभी एक रक्तदान, एक प्रेरक शब्द, एक शिविर और एक सही समय पर बढ़ाया गया हाथ भी समाज में गहरा प्रभाव छोड़ सकता है। उनकी सेवा यही संदेश देती है कि जब संकल्प व्यक्तिगत सीमा से आगे बढ़कर जनभागीदारी बन जाए, तभी रक्तदान एक अभियान से आगे बढ़कर सामाजिक संस्कृति का रूप लेता है।


🩸 प्रेरक संदेश 🩸

वैशाली पंड्या की सेवा-यात्रा हमें यह सिखाती है कि सच्ची महानता सम्मान पाने में नहीं, बल्कि किसी अनजान जीवन के लिए आशा बनने में है। रक्तदान केवल शरीर से रक्त देने का कार्य नहीं, बल्कि संवेदना, जिम्मेदारी और मानवीय कर्तव्य का जीवंत रूप है। एक नियमित रक्तदाता न केवल किसी जरूरतमंद का जीवन बचाता है, बल्कि अपने उदाहरण से अनेक लोगों के भीतर सेवा की नई चेतना भी जगाता है। वैशाली की यात्रा बताती है कि निरंतरता, अनुशासन और निस्वार्थ भावना से किया गया छोटा-सा प्रयास भी समाज में बड़ा परिवर्तन ला सकता है। यदि हर परिवार से एक योग्य व्यक्ति नियमित रक्तदाता बने, तो “हर घर रक्तदाता, घर-घर रक्तदाता” केवल अभियान नहीं, बल्कि जीवन बचाने वाली राष्ट्रीय संस्कृति बन सकता है। यही इस सम्मान की सबसे बड़ी सीख और सबसे प्रेरक संदेश है।

Mission Raktkranti Hindustan
हर घर रक्तदाता – घर-घर रक्तदाता
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🩸 वैशाली पंड्या की सच्ची और प्रेरक कहानी

रक्तदान, सेवा और मानवता को समर्पित उनकी प्रेरणादायक जीवन-यात्रा पढ़ने के लिए ऊपर दिए गए शीर्षक पर क्लिक करें।

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