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US-इजराइल हमलों के बीच ईरान से भारतीयों की वापसी, सरकार ने बताए पूरे आंकड़े
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US-इजराइल हमलों के बीच ईरान से भारतीयों की वापसी, सरकार ने बताए पूरे आंकड़े

मिडिल ईस्ट तनाव के बीच ईरान से भारतीयों की सुरक्षित वापसी: सरकार ने बताए ताजा आंकड़े

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव ने वैश्विक स्तर पर चिंता की लहर पैदा कर दी है। Iran, Israel और United States के बीच जारी संघर्ष ने न केवल क्षेत्रीय स्थिरता को प्रभावित किया है, बल्कि वहां रह रहे हजारों विदेशी नागरिकों की सुरक्षा पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इसी बीच भारत सरकार ने ईरान में फंसे भारतीय नागरिकों को सुरक्षित वापस लाने के प्रयासों में महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है।


अब तक कितने भारतीयों की हुई वापसी?

भारत सरकार के अनुसार, अब तक करीब 1,200 से अधिक भारतीय नागरिकों को सुरक्षित रूप से ईरान से निकाला जा चुका है। यह ऑपरेशन अत्यंत संवेदनशील परिस्थितियों में चलाया गया, जहां हर कदम पर सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई।

इनमें बड़ी संख्या छात्रों की है। लगभग 845 छात्र इस प्रक्रिया के तहत सुरक्षित अपने देश लौटे हैं। यह आंकड़ा इस बात को दर्शाता है कि विदेशों में पढ़ रहे भारतीय युवाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता में शामिल है।


किन रास्तों से हो रही है निकासी?

भारत ने इस ऑपरेशन के लिए सीधे मार्ग के बजाय वैकल्पिक सुरक्षित रास्तों का चयन किया। Armenia और Azerbaijan के जरिए भारतीय नागरिकों को बाहर निकाला जा रहा है।

सरकारी जानकारी के अनुसार:

  • 996 भारतीय नागरिक आर्मेनिया पहुंचे
  • 204 नागरिक अजरबैजान के रास्ते सुरक्षित निकाले गए

इन दोनों देशों में भारतीय दूतावास लगातार सक्रिय हैं और स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर नागरिकों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित कर रहे हैं।


विदेश मंत्रालय की सक्रिय भूमिका

Ministry of External Affairs India इस पूरे ऑपरेशन का नेतृत्व कर रहा है। मंत्रालय के प्रवक्ता Randhir Jaiswal ने बताया कि हर निकाले गए नागरिक के लिए ट्रांजिट व्यवस्था, भोजन, आवास और चिकित्सा सुविधाएं सुनिश्चित की गई हैं।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारतीय दूतावास लगातार लोगों के संपर्क में हैं और जरूरत पड़ने पर हर संभव सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।


क्यों पैदा हुआ यह संकट?

मिडिल ईस्ट में बढ़ते सैन्य तनाव के कारण हालात तेजी से बिगड़े हैं। मिसाइल हमलों और ड्रोन अटैक की घटनाओं ने आम नागरिकों के लिए खतरा बढ़ा दिया है।

इस संघर्ष में हजारों लोगों की जान जा चुकी है, जिससे क्षेत्र में भय और अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। ऐसे में विदेशों में रह रहे भारतीयों की सुरक्षा सुनिश्चित करना एक बड़ी चुनौती बन गया था।


 कूटनीतिक स्तर पर भारत की पहल

इस संकट के बीच Narendra Modi ने भी सक्रिय भूमिका निभाई है। उन्होंने वैश्विक नेताओं से लगातार बातचीत कर स्थिति को समझने और समाधान की दिशा में प्रयास किए हैं।

हाल ही में उन्होंने Mohammed bin Salman के साथ भी चर्चा की, जिसमें क्षेत्रीय तनाव और ऊर्जा सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया।


 वैश्विक असर और भारत पर प्रभाव

मिडिल ईस्ट में चल रहा यह संघर्ष केवल क्षेत्रीय मुद्दा नहीं है, बल्कि इसका असर वैश्विक स्तर पर भी देखने को मिल रहा है। तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, व्यापार मार्गों पर असर और ऊर्जा संकट जैसी समस्याएं उभर रही हैं।

भारत जैसे देश, जो ऊर्जा आयात पर निर्भर हैं, उनके लिए यह स्थिति आर्थिक और रणनीतिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण है।


भारतीय नागरिकों के लिए संदेश

सरकार ने ईरान और आसपास के क्षेत्रों में रह रहे भारतीय नागरिकों से अपील की है कि वे स्थानीय प्रशासन और भारतीय दूतावास के निर्देशों का पालन करें।

साथ ही, अनावश्यक यात्रा से बचने और सुरक्षा उपायों का पालन करने की सलाह दी गई है। सरकार ने यह भी आश्वासन दिया है कि जरूरत पड़ने पर और भी निकासी अभियान चलाए जाएंगे।

ईरान से भारतीय नागरिकों की सुरक्षित वापसी यह दर्शाती है कि संकट के समय समन्वित प्रयास और मजबूत कूटनीति कितनी अहम होती है।

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