किसी के जीवन को बचाने का संकल्प अक्सर किसी बड़े अवसर से नहीं, बल्कि जीवन के किसी गहरे अनुभव से जन्म लेता है। ऐसा ही प्रेरणादायी सफर है बिहार के भागलपुर की रहने वाली डॉ. नसीमा दिलकश जी का, जिन्होंने एक भावनात्मक पीड़ा को मानव सेवा के संकल्प में बदल दिया।
आज डॉ. नसीमा दिलकश का नाम स्वैच्छिक रक्तदान के क्षेत्र में एक प्रेरणादायी नाम हैं। वे अब तक 22 बार रक्तदान कर चुकी हैं और लगातार लोगों को रक्तदान के लिए जागरूक कर रही हैं। पेशे से वे एक शिक्षिका हैं और वर्तमान में एसएसपीएस कॉलेज, शंभूगंज (बांका) में राजनीति विज्ञान विषय की सहायक प्राध्यापक के रूप में अपनी सेवाएं दे रही हैं। शिक्षा के क्षेत्र में योगदान देने के साथ-साथ वे समाजसेवा को भी अपने जीवन का अभिन्न हिस्सा मानती हैं।
उनकी रक्तदान यात्रा के पीछे एक बेहद भावुक कहानी छिपी है। जब वे केवल 16 वर्ष की थीं, तब उनकी मामी कैंसर से पीड़ित थीं और उन्हें रक्त की आवश्यकता पड़ी। कम उम्र होने के कारण उस समय वे चाहकर भी रक्तदान नहीं कर सकीं। लेकिन उस असहायता और पीड़ा ने उनके मन पर गहरा प्रभाव छोड़ा। उसी दिन उन्होंने संकल्प लिया कि जब भी वे रक्तदान के योग्य होंगी, नियमित रूप से रक्तदान कर जरूरतमंदों की सहायता करेंगी।

वर्ष 2016 में उन्होंने पहली बार रक्तदान किया और फिर यह सेवा उनके जीवन का उद्देश्य बन गई। उनके लिए रक्तदान केवल एक प्रक्रिया नहीं, बल्कि मानवता के प्रति जिम्मेदारी है। उनका मानना है कि किसी अनजान व्यक्ति के जीवन में उम्मीद की किरण बनना ही सच्ची सेवा है।
एक शिक्षिका होने के कारण वे युवाओं के बीच भी जागरूकता फैलाने का कार्य करती हैं। वे मानती हैं कि युवा शक्ति यदि रक्तदान जैसे पुण्य कार्य से जुड़े, तो समाज में रक्त की कमी के कारण होने वाली अनेक परेशानियों को दूर किया जा सकता है।
एक ओर वे कॉलेज में विद्यार्थियों को शिक्षा का प्रकाश दे रही हैं, दूसरी ओर समाज में रक्तदान की भावना को मजबूत कर रही हैं। परिवार, नौकरी और समाजसेवा के बीच संतुलन बनाते हुए वे यह संदेश देती हैं कि सेवा के लिए केवल समय नहीं, बल्कि सच्ची इच्छा और समर्पण की आवश्यकता होती है।
डॉ. नसीमा दिलकश जी की कहानी यह बताती है कि जीवन में आया एक दर्द भी यदि सकारात्मक सोच के साथ स्वीकार किया जाए, तो वही दर्द हजारों लोगों के लिए प्रेरणा बन सकता है।
रक्तदान को जन-आंदोलन बनाने के प्रेरणादायी प्रयासों हेतु सम्मान।
विशेष साक्षात्कार : डॉ. नसीमा दिलकश जी से बातचीत
प्रश्न 1. अपना संक्षिप्त परिचय दीजिए।
उत्तर:
मेरा नाम डॉ. नसीमा दिलकश है। मैं बिहार के भागलपुर की रहने वाली हूँ। मैंने राजनीति विज्ञान विषय में पीएचडी की है और वर्तमान में एसएसपीएस कॉलेज, शंभूगंज (बांका) में सहायक प्राध्यापक के रूप में कार्यरत हूँ। शिक्षण कार्य के साथ-साथ मैं स्वैच्छिक रक्तदान और रक्तदान जागरूकता अभियान से जुड़ी हुई हूँ।
प्रश्न 2. आपको स्वैच्छिक रक्तदान की प्रेरणा कहाँ से मिली?
उत्तर:
रक्तदान की प्रेरणा मुझे मेरे जीवन के एक भावुक और पीड़ादायक अनुभव से मिली। जब मेरी एक रिश्तेदार कैंसर से पीड़ित थीं और उन्हें रक्त की आवश्यकता थी, उस समय मेरी उम्र कम होने के कारण मैं चाहकर भी रक्तदान नहीं कर सकी। उस असहाय स्थिति ने मेरे मन को बहुत प्रभावित किया। उसी दिन मैंने संकल्प लिया कि जब भी मैं रक्तदान के योग्य होऊँगी, नियमित रूप से रक्तदान कर जरूरतमंदों की सहायता करूँगी। वर्ष 2016 में मैंने पहली बार रक्तदान किया और तब से यह सेवा मेरे जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गई। रक्तदान मेरे लिए केवल एक कार्य नहीं, बल्कि मानवता के प्रति जिम्मेदारी और जीवन बचाने का माध्यम है।

प्रश्न 3. अब तक 22 बार रक्तदान करने की आपकी यात्रा कैसी रही?
उत्तर:
मेरे लिए अब तक 22 बार रक्तदान करना केवल एक संख्या नहीं, बल्कि मानवता की सेवा का एक अनमोल अवसर है। हर बार रक्तदान करने के बाद मुझे आत्मिक संतुष्टि और यह एहसास होता है कि मेरे छोटे-से प्रयास से किसी जरूरतमंद व्यक्ति के जीवन में आशा की किरण आ सकती है। इस यात्रा में मुझे अनेक ऐसे अनुभव मिले, जिन्होंने सेवा के प्रति मेरे विश्वास को और मजबूत किया। सबसे खुशी का क्षण वह होता है, जब किसी मरीज को समय पर रक्त मिल जाता है और उसके परिवार के चेहरे पर राहत और खुशी दिखाई देती है। यही मेरे लिए सबसे बड़ा सम्मान और प्रेरणा है। रक्तदान ने मुझे सिखाया है कि मानवता की सेवा से बड़ा कोई धर्म नहीं होता।
प्रश्न 4. एक प्रोफेसर, माँ और समाजसेवी होने के नाते जिम्मेदारियों में संतुलन कैसे बनाती हैं?
उत्तर:
मेरा मानना है कि जीवन में यदि सही समय प्रबंधन, अनुशासन और सेवा भावना हो, तो हर जिम्मेदारी को बेहतर तरीके से निभाया जा सकता है। एक शिक्षिका के रूप में विद्यार्थियों के भविष्य निर्माण की जिम्मेदारी, एक माँ के रूप में परिवार की जिम्मेदारी और एक समाजसेवी के रूप में मानव सेवा का कार्य मेरे जीवन के महत्वपूर्ण हिस्से हैं
प्रश्न 5. रक्तदान से जुड़ी कोई यादगार घटना बताइए।
उत्तर:
वैसे तो रक्तदान और रक्त सेवा से जुड़े अनेक ऐसे अनुभव हैं, जिन्होंने मेरे जीवन को गहराई से प्रभावित किया है। लेकिन थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों के लिए रक्तदान और रक्त की व्यवस्था करना मेरे लिए सबसे भावनात्मक अनुभवों में से एक रहा है। इन बच्चों को नियमित रूप से रक्त की आवश्यकता होती है और उनके चेहरे पर मुस्कान लाने का अवसर मिलना मेरे लिए बहुत संतोष और आत्मिक खुशी का विषय है।
प्रश्न 6. महिलाओं और युवाओं के लिए आपका क्या संदेश है?
उत्तर:
मेरा संदेश है कि यदि आप स्वस्थ हैं और चिकित्सकीय रूप से रक्तदान के योग्य हैं, तो बिना किसी संकोच और भय के स्वैच्छिक रक्तदान जरूर करें। रक्तदान एक सुरक्षित और सरल प्रक्रिया है, जिससे किसी भी प्रकार की स्थायी कमजोरी नहीं आती। विशेष रूप से महिलाओं और युवाओं को आगे बढ़कर इस महान सेवा से जुड़ना चाहिए। आपका एक यूनिट रक्त किसी जरूरतमंद व्यक्ति के जीवन में नई उम्मीद और खुशियां ला सकता है।
प्रश्न 7. रक्तदान को लेकर समाज में कौन-सी भ्रांतियां दूर करना चाहेंगी?
उत्तर:
रक्तदान को लेकर समाज में आज भी कई प्रकार की भ्रांतियां और गलत धारणाएं हैं। कुछ लोग मानते हैं कि रक्तदान करने से शरीर में कमजोरी आ जाती है या स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है, जबकि यह पूरी तरह गलत है। यदि कोई व्यक्ति स्वस्थ है और चिकित्सकीय रूप से रक्तदान के योग्य है, तो वह सुरक्षित रूप से रक्तदान कर सकता है। रक्तदान के बाद शरीर कुछ ही समय में नए रक्त का निर्माण कर लेता है।
मेरा मानना है कि हमें डर और भ्रम को दूर कर जागरूकता फैलाने की आवश्यकता है। सही जानकारी और सकारात्मक सोच के माध्यम से अधिक से अधिक लोगों को स्वैच्छिक रक्तदान से जोड़ना चाहिए, क्योंकि हमारा एक छोटा-सा प्रयास किसी जरूरतमंद के जीवन की रक्षा कर सकता है।
प्रश्न 8. भविष्य में आपका क्या संकल्प है?
उत्तर:
मेरा संकल्प है कि अधिक से अधिक युवाओं और महिलाओं को स्वैच्छिक रक्तदान के लिए प्रेरित करूँ और समाज में रक्तदान के प्रति जागरूकता को बढ़ावा दूँ। मैं चाहती हूँ कि कोई भी मरीज केवल रक्त की कमी के कारण जीवन न खोए। मेरा प्रयास रहेगा कि रक्तदान की संस्कृति को मजबूत बनाया जाए, ताकि जरूरत के समय हर व्यक्ति को समय पर रक्त उपलब्ध हो सके और मानव जीवन की रक्षा की जा सके।
प्रश्न 9. समाजसेवा आपके लिए क्या मायने रखती है?
उत्तर:
मेरे लिए समाजसेवा केवल एक कार्य नहीं, बल्कि मानवता के प्रति मेरा नैतिक दायित्व और जीवन का उद्देश्य है। मेरा विश्वास है कि किसी जरूरतमंद की छोटी-सी सहायता भी उसके जीवन में बड़ा बदलाव ला सकती है। चाहे रक्तदान हो, शिक्षा के माध्यम से मार्गदर्शन देना हो या सामाजिक जागरूकता फैलाना, हर सेवा समाज को बेहतर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। मेरा प्रयास हमेशा यही रहता है कि जहाँ भी किसी को मेरी आवश्यकता हो, मैं पूरी निष्ठा, संवेदनशीलता और समर्पण के साथ उसकी सहायता के लिए आगे बढ़ूँ।
प्रश्न 10. हमारे पाठकों के लिए आपका प्रेरणादायी संदेश।
उत्तर:
जीवन का सबसे बड़ा सुख किसी जरूरतमंद के चेहरे पर मुस्कान लाना है। यदि आप स्वस्थ हैं तो नियमित स्वैच्छिक रक्तदान करें, क्योंकि आपका छोटा-सा प्रयास किसी को जीवन का नया अवसर दे सकता है। साथ ही हमें अपने पर्यावरण, प्रकृति और आने वाली पीढ़ियों के प्रति भी जिम्मेदार बनना होगा। अधिक से अधिक पेड़ लगाएं, जल और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करें तथा प्रकृति के प्रति प्रेम और सम्मान का भाव रखें।
मैं सभी युवाओं से विशेष अपील करना चाहूँगी कि नशे से दूर रहें और स्वस्थ जीवन अपनाएं। नशा केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरे परिवार और समाज का नुकसान करता है। स्वस्थ शरीर, स्वच्छ पर्यावरण और सकारात्मक सोच से ही एक मजबूत राष्ट्र का निर्माण संभव है।
डॉ. नसीमा दिलकश जी के जीवन से शिक्षा
डॉ. नसीमा दिलकश जी का जीवन हमें सिखाता है कि सच्ची सेवा उम्र, पद या परिस्थिति की मोहताज नहीं होती। एक व्यक्तिगत पीड़ा को उन्होंने मानवता की सेवा के संकल्प में बदल दिया। उन्होंने साबित किया कि शिक्षा के साथ समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाना भी संभव है। उनका रक्तदान अभियान युवाओं और महिलाओं के लिए प्रेरणा है कि यदि मन में सेवा का भाव हो तो हर व्यक्ति समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकता है। उनका संदेश स्पष्ट है कि मानव जीवन की रक्षा से बड़ा कोई पुण्य कार्य नहीं है। रक्तदान केवल रक्त देना नहीं, बल्कि किसी परिवार की उम्मीद, किसी माँ की प्रार्थना और किसी जीवन की नई शुरुआत बनना है।

आइए, हम सब मिलकर रक्तदान, पर्यावरण संरक्षण और नशामुक्त समाज के निर्माण का संकल्प लें।
— प्रस्तुतकर्ता: himrang.com / समाज सेवा विशेष लेख
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