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मानवता के सच्चे नायकों का सम्मान: रक्तदाता महाकुंभ-2 में मिशन रक्तक्रांति ने किया प्रेरक व्यक्तित्वों का अभिनंदन

मानवता के सच्चे नायकों का सम्मान: रक्तदाता महाकुंभ-2 में मिशन रक्तक्रांति ने किया प्रेरक व्यक्तित्वों का अभिनंदन

गोपाल नारायण सिंह विश्वविद्यालय, जमुहार (रोहतास, बिहार) में आयोजित रक्तदाता महाकुंभ-2 केवल स्वैच्छिक रक्तदान का राष्ट्रीय आयोजन नहीं था, बल्कि यह मानवता की सेवा में समर्पित व्यक्तित्वों का सम्मान करने का भी ऐतिहासिक अवसर बना। देश के विभिन्न राज्यों तथा नेपाल से आए रक्तदाताओं, समाजसेवियों और प्रेरक व्यक्तित्वों ने इस आयोजन की गरिमा बढ़ाई। मिशन रक्तक्रांति हिंदुस्तान,  संकल्प सेवा फाउंडेशन तथा Himrang.comहिमाचल प्रदेश , के संयुक्त तत्वावधान में ऐसे विशिष्ट व्यक्तित्वों को सम्मानित किया गया, जिन्होंने रक्तदान, मानव सेवा, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण और सामाजिक जागरूकता के क्षेत्र में प्रेरणादायी योगदान दिया है। सम्मान का उद्देश्य केवल उपलब्धियों का अभिनंदन करना नहीं, बल्कि समाज के सामने प्रेरणास्रोत व्यक्तित्वों को प्रस्तुत करना भी था।


अरुणाचल प्रदेश की श्रीमती एनी टाकी तलोह (आयी) को मिला विशेष सम्मान

श्रीमती एनी टाकी तलोह को The Pride of Blood Donor एवं Iconic Blood Donor सम्मान प्रदान करते हुए।
श्रीमती एनी टाकी तलोह को The Pride of Blood Donor  सम्मान प्रदान करते हुए।

अरुणाचल प्रदेश की वरिष्ठ समाजसेवी एवं AYANG संस्था की संस्थापक श्रीमती एनी टाकी तलोह (आयी) को मिशन रक्तक्रांति द्वारा विशेष रूप से सम्मानित किया गया। वे स्वयं 45 से अधिक बार स्वैच्छिक रक्तदान कर चुकी हैं और पिछले चार दशकों से हजारों लोगों को रक्तदान के लिए प्रेरित कर रही हैं। रक्तदाता महाकुंभ-2 में उन्होंने अपने प्रेरणादायी उद्बोधन से विशेषकर युवाओं और नए रक्तदाताओं को स्वैच्छिक रक्तदान का महत्व समझाया। उनकी सेवा, नेतृत्व और समर्पण को देखते हुए मिशन रक्तक्रान्ति हिंदुस्तान ने उन्हें “The Pride of Blood Donor” तथा “Iconic Blood Donor” सम्मान प्रदान कर स्मृति-चिह्न भेंट किया गया।


नेपाल से आए प्रतिनिधियों का आत्मीय अभिनंदन

नेपाल के प्रतिनिधियों का आत्मीय सम्मान।
नेपाल के प्रतिनिधियों का आत्मीय सम्मान।

रक्तदाता महाकुंभ-2 ने अंतरराष्ट्रीय भाईचारे का भी सुंदर उदाहरण प्रस्तुत किया। नेपाल से आए वरिष्ठ समाजसेवी जनक खड़का, राजू भंडारी, उनके सहयोगी प्रतिनिधियों तथा महिला सदस्यों का पारंपरिक भारतीय सम्मान के साथ अभिनंदन किया गया। इन सभी ने नेपाल में स्वैच्छिक रक्तदान और सामाजिक सेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किए हैं। मिशन रक्तक्रांति ने उन्हें स्मृति-चिह्न भेंट कर भारत-नेपाल के बीच सेवा और मानवता के रिश्तों को और मजबूत बनाने का संदेश दिया। यह सम्मान केवल व्यक्तियों का नहीं, बल्कि दोनों देशों के बीच मानवीय सहयोग और मित्रता का भी सम्मान था।


हरियाणा की बेटी नेहा रानी एवं अन्य प्रेरक व्यक्तित्व

हरियाणा की समाजसेवी नेहा रानी को स्मृति-चिह्न भेंट करते हुए।
हरियाणा की समाजसेवी नेहा रानी को स्मृति-चिह्न भेंट करते हुए।

हरियाणा की समाजसेवी नेहा रानी को भी विशेष सम्मान से अलंकृत किया गया। वे अनेक स्वास्थ्य जागरूकता अभियानों, विशेषकर पल्स पोलियो अभियान सहित विभिन्न जनस्वास्थ्य कार्यक्रमों की ब्रांड एंबेसडर रह चुकी हैं। उन्हें उनके सामाजिक योगदान के लिए राष्ट्रपति द्वारा भी सम्मानित किया जा चुका है। वे रक्तदान के साथ निर्धन एवं छोटे बच्चों की शिक्षा में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं। उनकी सरलता, मृदुभाषिता और सेवा-भाव सभी के लिए प्रेरणा है। इसी क्रम में नागालैंड से आए समाजसेवी असिन टैप को भी स्मृति चिन्ह प्रदान किया गया, जिन्होंने पूर्वोत्तर भारत में मानव सेवा और सामाजिक जागरूकता के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किए हैं।


यह भी पढ़ें: रक्तदाता महाकुंभ-2 बना राष्ट्रीय प्रेरणा का केंद्र, देशभर के रक्तवीरों ने दिया मानवता का संदेश



झारखंड और पश्चिम बंगाल के प्रेरक समाजसेवियों का सम्मान

झारखंड के वरिष्ठ समाजसेवी रवि कुमार जी को स्मृति-चिह्न भेंट करते हुए।
झारखंड के वरिष्ठ समाजसेवी रवि कुमार जी को स्मृति-चिह्न भेंट करते हुए।

कार्यक्रम के दौरान झारखंड के वरिष्ठ समाजसेवी रवि कुमार जी को भी पारम्परिक स्मृति चिन्ह भेंट किया गया। उन्होंने पुरस्कार वितरण समारोह का प्रभावशाली मंच संचालन किया। वे झारखंड में रोटी बैंक का संचालन करते हैं तथा भुली ब्लड बैंक के माध्यम से रक्तदान जागरूकता का उल्लेखनीय कार्य कर रहे हैं।

इसके अतिरिक्त मिशन रक्तक्रांति हिंदुस्तान के वरिष्ठ सदस्य एवं शतकवीर रक्तदाता रंजीत भाई मिश्रा (निमती, अलीपुरद्वार, पश्चिम बंगाल) को भी स्मृति चिन्ह प्रदान किया गया। सीमित संसाधनों के बावजूद वे आदिवासी क्षेत्र में रक्तदान, सामाजिक सेवा और जनहित के कार्यों में निरंतर सक्रिय हैं। उन्होंने अपने निजी संसाधनों से ग्रामीणों की सुविधा के लिए सड़क निर्माण जैसे कार्य भी किए हैं। पश्चिम बंगाल के ही तीर्थांकर कर्माकर को भी उनके सामाजिक योगदान के लिए सम्मानित किया गया।


बिहार, हरियाणा और अन्य राज्यों के प्रेरक रक्तदाताओं का सम्मान

प्रेरक रक्तदाताओं का सम्मान |
प्रेरक रक्तदाताओं का सम्मान |

इस अवसर पर हरियाणा के डबल सेंचुरी ब्लड डोनर दिनेश बक्शी जी, जिन्होंने 200 से अधिक बार स्वैच्छिक रक्तदान कर असंख्य लोगों का जीवन बचाने में योगदान दिया है, उन्हें भी विशेष सम्मान प्रदान किया गया। बिहार के समाजसेवी अतुल कुमार जी को मानवता की सेवा और सामाजिक समर्पण के लिए स्मृति-चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया। इस कार्यक्रम मे अनेक अन्य रक्तदाताओं, समाजसेवियों और स्वयंसेवकों को भी स्मृति-चिह्न देकर सम्मानित किया गया। इन सभी व्यक्तित्वों ने अपने-अपने क्षेत्रों में निस्वार्थ सेवा, रक्तदान, स्वास्थ्य जागरूकता, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक सहयोग का अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया है। यह सम्मान समाज के उन मौन कर्मयोगियों के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक था, जो बिना किसी स्वार्थ के मानवता की सेवा में निरंतर कार्यरत हैं।


सम्मान से बढ़ता है सेवा का संकल्प

पश्चिम बंगाल, हरियाणा एवं अन्य राज्यों के प्रेरक रक्तदाताओं को सम्मानित किया गया।
पश्चिम बंगाल, हरियाणा एवं अन्य राज्यों के प्रेरक रक्तदाताओं को सम्मानित किया गया।

रक्तदाता महाकुंभ-2 में सम्मिलित समाजसेवी लोगो को स्मृति चिन्ह भेंट करके मिशन रक्तक्रान्ति हिंदुस्तान से जुड़े लोगो के लिए गौरवान्वित करने वाले क्षण बीके साथ समाज में सेवा-संस्कार, प्रेरणा और सकारात्मक ऊर्जा का संदेश देने वाला एक ऐतिहासिक अभियान बन गया। मिशन रक्तक्रांति हिंदुस्तान, sankalpseva.org तथा Himrang.comहिमाचल प्रदेश, समय-समय पर ऐसे प्रेरक व्यक्तित्वों को सम्मानित करते रहते हैं, जो मानवता, राष्ट्र, प्रकृति, शिक्षा, स्वास्थ्य और स्वैच्छिक रक्तदान के क्षेत्र में निस्वार्थ योगदान देते हैं। ऐसे सम्मान समाज के अनदेखे नायकों को नई पहचान देते हैं और नई पीढ़ी को सेवा के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा प्रदान करते हैं। रक्तदाता महाकुंभ-2 ने यह सिद्ध कर दिया कि जब सेवा का सम्मान होता है, तब समाज में सेवा का विस्तार भी होता है। मानवता की रक्षा केवल शब्दों से नहीं, बल्कि कर्म, समर्पण और प्रेरणा से होती है, और यही इस आयोजन की सबसे बड़ी उपलब्धि रही।

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