हिमाचल के अर्की में भीषण अग्निकांड: 3 की मौत, कई झुलसे, करोड़ों का नुकसान
हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले के अर्की कस्बे में रविवार देर रात भड़की भीषण आग ने न केवल एक बाजार को राख कर दिया, बल्कि कई परिवारों की जिंदगियां भी उजाड़ दीं। इस दुखद अग्निकांड में तीन लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जिसमें एक मासूम बच्चा शामिल है, जबकि कई लोग झुलसे हैं और 6-10 से अधिक लापता बताए जा रहे हैं। पुराने बाजार की तंग गलियों में फैली यह आग लापरवाही, पुराने ढांचों और सुरक्षा मानकों की कमी का कड़वा सबक बन गई, जिससे करोड़ों रुपये का भारी नुकसान हुआ।
घटना का पूरा विवरण
11 जनवरी 2026 को रात करीब 2:30 से 3:00 बजे के बीच अर्की के निचले पुराने बाजार में आग की शुरुआत हुई। यह क्षेत्र यूको बैंक के पास स्थित है, जहां मुख्य रूप से छोटे व्यापारी, किराना दुकानें, कपड़े की दुकानें, हार्डवेयर स्टोर और ढाबे हैं। ऊपरी मंजिलों पर प्रवासी मजदूर परिवार रहते थे, ज्यादातर नेपाली मूल के। प्रारंभिक आग एक चार मंजिला लकड़ी-मिट्टी के भवन की तीसरी मंजिल से लगी, जो राजीव गुप्ता की संपत्ति थी। इस भवन में निचली मंजिलें दुकानों के लिए थीं, जबकि ऊपरी पर किराएदार परिवार ठहरे हुए थे।
सर्दियों की कड़ाके की ठंड में परिवार ने कमरे में ही अंगीठी जला रखी थी। आधी रात को सोते समय चिंगारी गिरने से लकड़ी के फर्नीचर और सामान में आग भड़क उठी। स्थानीय लोगों के अनुसार, पहले तो धुआं फैला, फिर अचानक नौ गैस सिलेंडरों के जोरदार धमाके हुए। इन धमाकों की गूंज से पूरा कस्बा जाग उठा। आग की लपटें इतनी तेज थीं कि आसपास के पांच भवनों तक फैल गईं। संकरी गलियां होने से दमकल वाहनों का पहुंचना मुश्किल हो गया। कई लोग ऊपरी मंजिलों से कूदने को मजबूर हुए, जिससे चोटें लगीं।
आग लगने के प्रमुख कारण
जांच में सामने आया कि मुख्य कारण अंगीठी की लापरवाही थी। नेपाली परिवार ने आग को बंद किए बिना सो गए, जिससे चिंगारी फैल गई। इसके अलावा:
-
पुराने लकड़ी-मिट्टी के भवन, जो आग के लिए ज्वलनशील थे।
-
दुकानों में अनियमित रूप से रखे गैस सिलेंडर, जिनके धमाकों ने आग को भयावह बना दिया।
-
कोई फायर एस्केप या स्मोक डिटेक्टर न होना।
-
बिजली के पुराने तारों से शॉर्ट सर्किट की आशंका भी जताई जा रही है।
हिमाचल जैसे पहाड़ी क्षेत्रों में सर्दियों में अंगीठी का उपयोग आम है, लेकिन जागरूकता की कमी घातक साबित हुई। एफएसएल टीम ने साइट से सैंपल लिए हैं।
हताहतों और झुलसों की स्थिति
यह अग्निकांड सबसे ज्यादा मासूमों पर भारी पड़ा। अब तक तीन शव बरामद हुए:
-
एक 7-8 वर्षीय बिहार मूल का बच्चा, जो कपड़े की दुकान पर सोया था।
2-3. दो नेपाली प्रवासी, जिनकी पहचान बाद में हुई।
आशंका है कि 10 या इससे अधिक लोग जिंदा जल चुके हों। दो लोग गंभीर रूप से झुलसे, जिनका अर्की नागरिक अस्पताल में इलाज चल रहा। धुएं से कईयों को सांस की तकलीफ हुई, जिन्हें प्राथमिक उपचार दिया गया। बचाव में एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, होमगार्ड, फायर ब्रिगेड और जेसीबी मशीनें लगीं। मंगलवार 13 जनवरी तक मलबा हटाने का काम जारी था।
मलबे में दबे लापता लोगों की विस्तृत सूची
प्रशासन द्वारा जारी प्रारंभिक सूची में मुख्य रूप से नेपाली प्रवासी शामिल हैं, जो एक ही भवन में रहते थे। यह सूची हृदयविदारक है:
| क्रमांक | नाम | लिंग | आयु | पता |
|---|---|---|---|---|
| 1 | Kanshiram S/o Hariram | Male | 42 वर्ष | Salyan District, Karnali Pradesh, Nepal |
| 2 | Smt. Tika W/o Kanshiram | Female | 30 वर्ष | Salyan District, Karnali Pradesh, Nepal |
| 3 | Kumari Anu D/o Kanshiram | Female | 13 वर्ष | Salyan District, Karnali Pradesh, Nepal |
| 4 | Sandeep S/o Kanshiram | Male | 8 वर्ष | Salyan District, Karnali Pradesh, Nepal |
| 5 | Dhanbahadur | Male | 33 वर्ष | Salyan District, Karnali Pradesh, Nepal |
| 6 | Kavita W/o Dhanbahadur | Female | 32 वर्ष | Salyan District, Karnali Pradesh, Nepal |
| 7 | Radha D/o Dhanbahadur | Female | 16 वर्ष | Salyan District, Karnali Pradesh, Nepal |
| 8 | Rihanu / Renuka D/o Dhanbahadur | Female | 11 वर्ष | Salyan District, Karnali Pradesh, Nepal |
| 9 | Rejan S/o Dhanbahadur | Male | 1.6 वर्ष | Salyan District, Karnali Pradesh, Nepal |
📌 नोट: उपरोक्त सूची प्रशासन द्वारा जारी प्रारंभिक जानकारी पर आधारित है। तलाश एवं राहत कार्य जारी है।
संपत्ति और आर्थिक नुकसान
आग ने अर्की बाजार को पूरी तरह तबाह कर दिया। प्रभावित क्षेत्र:
-
15 से अधिक रिहायशी घर पूरी तरह नष्ट।
-
8 दुकानें: किराना, कपड़ा, मोबाइल, हार्डवेयर, ढाबे जलकर राख।
-
राजीव गुप्ता का चार मंजिला भवन ढह गया।
-
गोदामों में रखा माल, घरेलू सामान, दस्तावेज, नकदी नष्ट।
नुकसान का प्रारंभिक आंकड़ा करोड़ों रुपये है। छोटे व्यापारियों की आजीविका छिन गई। हिमाचल में 2020-2025 तक आग से 22 मौतें और करोड़ों का नुकसान हुआ, अर्की इसका नवीनतम उदाहरण।
राहत और बचाव कार्य का ब्योरा
सूचना मिलते ही सोलन, नालागढ़, अर्की से 6 दमकल गाड़ियां पहुंचीं। डीसी, एसपी गौरव सिंह, एडीसी राहुल जैन ने रातभर मौके पर डेरा डाला। चुनौतियां:
-
संकरी गलियां, जहां दमकल वाहन मुश्किल से पहुंचे।
-
लगातार धमाके और ऊंची लपटें।
-
मलबा हटाने के लिए जेसीबी का उपयोग।
स्थानीय युवाओं ने साहस दिखाया—घायलों को कंधों पर उठाकर अस्पताल पहुंचाया, पानी की सप्लाई की। प्रशासन ने तुरंत वस्त्र, भोजन, अस्थायी आश्रय दिए। पुलिस ने धारा 287 बीएनएस के तहत केस दर्ज किया।स्थानीय लोगों का आक्रोश और मांगें
-
पुराने बाजारों में अनिवार्य फायर सेफ्टी ऑडिट।
-
गैस सिलेंडरों का केंद्रीकृत सुरक्षित भंडारण।
-
दमकल वाहनों के लिए चौड़ी सड़कें और स्थायी पहुंच मार्ग।
-
बिजली तारों का भूमिगत आधुनिकीकरण।
-
प्रत्येक भवन में स्मोक अलार्म और फायर एस्केप अनिवार्य।
-
वार्षिक मॉक ड्रिल और जागरूकता शिविर।
लोग चिल्ला रहे हैं, “त्रासदी के बाद नहीं, पहले सुरक्षा सुनिश्चित करो!”
व्यापक संदर्भ और सबक
हिमाचल के पहाड़ी कस्बों में ऐसी घटनाएं बढ़ रही हैं। कारण: पुराने ढांचे, घनी आबादी, गैस का दुरुपयोग। समाजसेवी संगठन जैसे ‘संकल्प सेवा’ को आगे आना चाहिए—रक्तदान के साथ अग्नि सुरक्षा जागरूकता अभियान चलाएं। सरकार सख्त भवन नियम, हर कस्बे में फायर स्टेशन और प्रशिक्षण केंद्र बनाए। यह त्रासदी याद दिलाती है कि छोटी लापरवाही बड़ी तबाही लाती है। अर्की के शोकाकुल परिवारों के लिए प्रार्थना, और भविष्य के लिए संकल्प। सुरक्षा पहले, ताकि कोई मां बेटे को, कोई बाजार चहल-पहल खोए नहीं।
HIMRANG Awareness & Social News for a Better Society