वैश्विक राजनीति और आर्थिक घटनाओं का असर अक्सर शेयर बाजार पर तुरंत दिखाई देता है। हाल के दिनों में मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव ने दुनिया भर के वित्तीय बाजारों को अस्थिर कर दिया है। इसका असर भारत के शेयर बाजार पर भी साफ दिखाई दिया, जहां एक सप्ताह के भीतर निवेशकों की संपत्ति में भारी गिरावट दर्ज की गई।
बीते कारोबारी सप्ताह में भारतीय शेयर बाजार में तेज गिरावट देखने को मिली। इस दौरान बीएसई सेंसेक्स और एनएसई निफ्टी दोनों प्रमुख सूचकांक लगातार दबाव में रहे। बाजार में आई इस कमजोरी के कारण निवेशकों की कुल संपत्ति लगभग 19 लाख करोड़ रुपये से अधिक घट गई, जिससे बाजार में चिंता का माहौल बन गया।
सप्ताह के आखिरी दिन बाजार में भारी गिरावट
सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन बाजार में बड़ी गिरावट दर्ज की गई।
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सेंसेक्स लगभग 1470 अंक गिरकर 74,563 के आसपास बंद हुआ।
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निफ्टी करीब 488 अंक टूटकर 23,151 के स्तर पर आ गया।
लगातार गिरावट के कारण निवेशकों का भरोसा कमजोर पड़ा और कई सेक्टरों में तेज बिकवाली देखने को मिली।
विशेषज्ञों के अनुसार बाजार में यह गिरावट केवल घरेलू कारणों से नहीं बल्कि वैश्विक तनाव और अनिश्चितता के कारण भी बढ़ी।
निवेशकों को हुआ भारी नुकसान
बाजार में आई इस गिरावट का सीधा असर निवेशकों की संपत्ति पर पड़ा।
पूरे सप्ताह के दौरान निवेशकों को लगभग 19.86 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
केवल एक कारोबारी दिन में ही बाजार पूंजीकरण में करीब 10 लाख करोड़ रुपये से अधिक की गिरावट दर्ज की गई।
इस तरह की गिरावट से छोटे और बड़े दोनों तरह के निवेशकों के बीच चिंता बढ़ गई है।
मिडिल ईस्ट तनाव का बाजार पर असर
हाल के समय में मिडिल ईस्ट क्षेत्र में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने वैश्विक बाजारों को अस्थिर बना दिया है।
जब भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर युद्ध या राजनीतिक संकट की स्थिति बनती है, तो निवेशक जोखिम से बचने के लिए बाजार से दूरी बनाने लगते हैं।
ऐसे समय में आमतौर पर:
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तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव बढ़ जाता है
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वैश्विक निवेशक सुरक्षित निवेश विकल्प तलाशते हैं
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शेयर बाजार में बिकवाली बढ़ जाती है
इसी वजह से भारतीय बाजार में भी दबाव बढ़ गया।
किन सेक्टरों में सबसे ज्यादा गिरावट
इस सप्ताह कई प्रमुख सेक्टरों में कमजोरी देखी गई।
सबसे ज्यादा दबाव ऑटो सेक्टर पर पड़ा, जिसमें लगभग 10 प्रतिशत से अधिक गिरावट दर्ज की गई।
इसके अलावा अन्य सेक्टरों में भी गिरावट देखने को मिली:
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पीएसयू बैंक सेक्टर – करीब 7% गिरावट
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मेटल सेक्टर – लगभग 6% कमजोरी
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रियल एस्टेट सेक्टर – लगभग 4% गिरावट
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ऑयल एंड गैस सेक्टर – करीब 4% गिरावट
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आईटी सेक्टर – लगभग 3% गिरावट
इन सेक्टरों में लगातार बिकवाली से बाजार का माहौल और कमजोर होता गया।
विदेशी निवेशकों ने बढ़ाई बिकवाली
बाजार में गिरावट का एक बड़ा कारण विदेशी निवेशकों की बिकवाली भी माना जा रहा है।
अनिश्चित माहौल के कारण विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) भारतीय बाजार से लगातार पैसा निकाल रहे हैं।
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार:
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एक ही दिन में विदेशी निवेशकों ने लगभग 10,700 करोड़ रुपये के शेयर बेचे
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पूरे सप्ताह में करीब 36,000 करोड़ रुपये की बिकवाली हुई
हालांकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने कुछ हद तक खरीदारी करके बाजार को संभालने की कोशिश की, लेकिन गिरावट को पूरी तरह रोकना संभव नहीं हो पाया।
आगे बाजार के लिए क्या संकेत
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में बाजार की दिशा काफी हद तक वैश्विक परिस्थितियों पर निर्भर करेगी।
यदि मिडिल ईस्ट में तनाव कम होता है तो बाजार में स्थिरता लौट सकती है।
लेकिन यदि स्थिति और गंभीर होती है तो निवेशकों को और उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ सकता है।
निवेशकों को ऐसे समय में घबराने के बजाय दीर्घकालिक रणनीति और संतुलित निवेश दृष्टिकोण अपनाने की सलाह दी जाती है।
निष्कर्ष
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर केवल राजनीति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका प्रभाव वैश्विक अर्थव्यवस्था और शेयर बाजारों पर भी पड़ता है।
भारतीय शेयर बाजार में हाल की गिरावट इसी वैश्विक अनिश्चितता का परिणाम मानी जा रही है।
एक सप्ताह में निवेशकों की संपत्ति में करीब 19 लाख करोड़ रुपये की कमी यह दिखाती है कि अंतरराष्ट्रीय घटनाएं किस तरह बाजार की दिशा बदल सकती हैं।
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