|| हिमरंग विशेष || रक्तदान यात्रा ||

बिहार के मिथिला क्षेत्र की सांस्कृतिक राजधानी दरभंगा में आयोजित “मिथिला मीट–2026” के रक्तदान शिविर में हिमाचल प्रदेश के रक्तदाता एवं समाजसेवी नरेश शर्मा ने अपने जीवन का 129वाँ स्वैच्छिक रक्तदान किया। सोशल एक्टिविस्ट वेलफेयर एसोसिएशन ऑफ भारत (SAWAB) द्वारा आयोजित यह शिविर तारामंडल सह ज्ञान एवं विज्ञान संग्रहालय के ऑडिटोरियम में संपन्न हुआ। देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचे रक्तदाताओं और समाजसेवियों की उपस्थिति ने इस अवसर को भव्य तथा यादगार बना दिया। यह उपलब्धि निरंतर सेवा और सामाजिक उत्तरदायित्व का प्रेरक उदाहरण है। करीब दो वर्ष पहले नरेश शर्मा को भगवान श्रीराम की जन्मभूमि अयोध्या में रक्तदान करने का अवसर मिला था। अब जगतजननी माता सीता की जन्मभूमि मिथिला में किया गया रक्तदान उनकी सेवायात्रा का अत्यंत भावनात्मक पड़ाव बना।
मिथिला मीट–2026: देशभर के समाजसेवियों का संगम
मिथिला मीट–2026 केवल एक सम्मेलन नहीं, बल्कि रक्तदान और समाजसेवा के क्षेत्र में कार्यरत सेवाभावी व्यक्तियों को राष्ट्रीय मंच पर जोड़ने का सार्थक प्रयास रहा। आयोजन का उद्देश्य रक्तदाताओं एवं समाजसेवियों को प्रेरित, प्रोत्साहित, प्रशिक्षित और जागरूक करना था। इसके साथ समाजसेवियों की पहचान, उनकी सुरक्षा, उनके परिवारों के कल्याण और भविष्य से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर सामूहिक विचार-विमर्श किया गया। SAWAB के अध्यक्ष डॉ. दीपक कुमार महाथा के मार्गदर्शन एवं दूरदर्शी सोच में आयोजित कार्यक्रम अत्यंत सुव्यवस्थित और प्रभावशाली रहा। दरभंगा का तारामंडल आधुनिक ज्ञान, विज्ञान और प्रगतिशील चेतना का प्रमुख केंद्र है। ऐसे प्रतिष्ठित स्थान पर मानवता और रक्तसेवा को समर्पित आयोजन होना परंपरा तथा आधुनिक सामाजिक सोच के सुंदर समन्वय का प्रतीक बना।
उज्जैन, शिमला और दरभंगा से जुड़ी रक्तसेवा यात्रा

वर्ष 2026 में नरेश शर्मा की रक्तदान यात्रा देश के तीन महत्वपूर्ण आध्यात्मिक, सामाजिक और चिकित्सा केंद्रों से जुड़ी रही। 28 फरवरी 2026 को उन्होंने मध्य प्रदेश के उज्जैन में बाबा महाकाल के पावन प्रांगण में रक्तदान किया। इसके बाद 02 जून 2026 को हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला स्थित इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल—IGMC में उन्होंने 128वाँ स्वैच्छिक रक्तदान किया। अब दरभंगा में मिथिला मीट के अवसर पर उनका 129वाँ रक्तदान संपन्न हुआ। ये रक्तदान किसी व्यक्तिगत कीर्तिमान या संख्या के प्रदर्शन के लिए नहीं, बल्कि जरूरतमंदों का जीवन बचाने के उद्देश्य से किए गए सेवा-प्रयास हैं।
तीन दशकों से मानवता, राष्ट्र और प्रकृति की सेवा

नरेश शर्मा पिछले 30 वर्षों से अधिक समय से मानवता की सेवा और जरूरतमंद लोगों की सहायता में सक्रिय हैं। इस सेवायात्रा में वह सैकड़ों रक्तदान शिविरों, रक्तदान जागरूकता अभियानों, नशामुक्ति कार्यक्रमों और सामाजिक सहायता गतिविधियों से जुड़ चुके हैं। वह जरूरतमंद मरीजों के लिए रक्तदाताओं की व्यवस्था करने, आपातकालीन परिस्थितियों में परिवारों की सहायता करने और युवाओं को नियमित रक्तदान के लिए प्रेरित करने में भी निरंतर सक्रिय रहते हैं। वह संकल्प सेवा फाउंडेशन, SankalpSeva.org, Himrang.com और देवभूमि सोशल फाउंडेशन के माध्यम से मानवता, राष्ट्र, समाज और प्रकृति की सेवा से जुड़े कार्यों को आगे बढ़ा रहे हैं। भारत की प्रतिष्ठित समाजसेवी संस्था “मिशन रक्त क्रांति हिंदुस्तान” से जुड़कर वह “हर घर रक्तदाता—घर-घर रक्तदाता” के जनसंकल्प को भी जन-जन तक पहुंचाने में सहयोग कर रहे हैं।
संख्या नहीं, किसी परिवार की लौटती मुस्कान है रक्तदान

नरेश शर्मा की रक्तदान यात्रा का मूल संदेश स्पष्ट है—रक्तदान की सार्थकता उसकी संख्या से नहीं, बल्कि उससे बचने वाले जीवन से निर्धारित होती है। रक्त की एक यूनिट किसी दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति, गंभीर रोगी, प्रसूता महिला अथवा उपचाराधीन बच्चे के लिए नई आशा बन सकती है। उनका प्रत्येक रक्तदान किसी असहाय व्यक्ति का जीवन बचाने और उसके परिवार में खुशियां लौटाने का विनम्र प्रयास है। रक्तदान में जाति, धर्म, भाषा, क्षेत्र या आर्थिक स्थिति का कोई भेद नहीं होता। यही इसकी सबसे बड़ी शक्ति है। नरेश शर्मा का मानना है कि सम्मान प्राप्त करने से अधिक महत्वपूर्ण जरूरतमंद के कठिन समय में उसके साथ खड़ा होना है। सेवा की वास्तविक पहचान मंच से नहीं, बल्कि बचाए गए जीवन और परिवार के चेहरे पर लौटी मुस्कान से होती है।
युवाओं और समाजसेवियों के लिए प्रेरक संदेश

यह प्रेरक यात्रा युवाओं से आह्वान करती है कि स्वस्थ और चिकित्सकीय मानकों के अनुसार योग्य होने पर वे भय, भ्रम एवं संकोच छोड़कर नियमित स्वैच्छिक रक्तदान करें। स्वयं आगे आने के साथ परिवार, मित्रों और सहकर्मियों को भी रक्तदान के लिए प्रेरित करें। युवाओं को अंगदान, नेत्रदान और देहदान के प्रति जानकारी प्राप्त करके पंजीकरण के लिए भी आगे बढ़ना चाहिए। उनका छोटा-सा संकल्प किसी जरूरतमंद को नया जीवन और उसके परिवार को जीवनभर की खुशियां दे सकता है। समाजसेवियों के लिए भी संदेश है कि सेवा को मंच, सम्मान, प्रचार और तस्वीरों तक सीमित न रखें। किसी जरूरतमंद के आंसू पोंछना, संकट में फंसे परिवार का सहारा बनना और बुझती उम्मीद को फिर जगाना ही सच्ची समाजसेवा है। आइए संकल्प लें कि रक्त के अभाव में किसी की जान नहीं जाने देंगे। स्वयं रक्तदान करेंगे, दूसरों को प्रेरित करेंगे और “हर घर रक्तदाता—घर-घर रक्तदाता” के अभियान को प्रत्येक गांव, शहर और परिवार तक पहुंचाएंगे। मानवता की सेवा सबसे बड़ा धर्म और जीवन बचाना ईश्वर की सच्ची आराधना है।
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