नेपाल में तख्तापलट के बाद केपी ओली की प्रतिक्रिया
Gen-Z विरोध और ओली का संदेश
तख्तापलट के बाद, पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की प्रतिक्रिया सामने आई। इसी क्रम में, उन्होंने शिवपुरी से Gen-Z विरोध में शामिल युवाओं के लिए लिखित संदेश भेजा।
ओली ने पुलिस गोलीबारी में मारे गए युवाओं को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा, “सरकारी कार्यालयों में आगजनी और तोड़फोड़ अचानक नहीं हुई। आपके मासूम चेहरों का इस्तेमाल गुमराह करने के लिए किया जा रहा है।”
लिपुलेख पर दोहराया रुख
काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, ओली ने फिर लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा पर नेपाल के दावे का समर्थन किया। उन्होंने कहा, लोकतंत्र बोलने, आने-जाने और सवाल करने का अधिकार देता है। इसलिए, उसकी रक्षा उनका उद्देश्य रहा है।
उधर, उन्होंने 1994 में अपने गृहमंत्री कार्यकाल को याद किया। उस समय, उनके अनुसार, एक भी गोली नहीं चली। उन्होंने खुद को शांति-समर्थक बताया। हालांकि, उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ शक्तियाँ Gen-Z प्रदर्शनों का सहारा लेकर तोड़फोड़ करा रही हैं।
अंतरिम सरकार की कवायद
इस बीच, नेपाल में अंतरिम सरकार बनाने की कोशिशें तेज हो गईं। 8 सितंबर को हुए Gen-Z विरोध में 30 लोगों की मौत हुई। इसके अलावा, सार्वजनिक संपत्ति को भारी नुकसान पहुंचा।
इस्तीफे की मांग जारी रही, फिर भी ओली 9 सितंबर दोपहर तक पद पर रहे। दूसरी ओर, नेपाल की पहली महिला चीफ जस्टिस सुशीला कार्की का नाम अंतरिम प्रधानमंत्री की दौड़ में आगे दिखा। काठमांडू के मेयर बालेन ने भी उनका समर्थन किया। इसी दौरान, कार्की ने कहा कि वे नेतृत्व के लिए तैयार हैं, क्योंकि Gen-Z उन्हें पसंद करता है।
हिंसा और वीआईपी ठिकानों पर हमला
इसी दौरान, प्रदर्शनकारियों ने कर्फ्यू और सुरक्षा तैनाती को नज़रअंदाज़ किया। नतीजतन, कई जगह आगजनी हुई। उन्होंने बालकोट में ओली के निजी आवास को भी आग लगा दी।
यही नहीं, प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल, पूर्व प्रधानमंत्री प्रचंड, संचार मंत्री पृथ्वी सुब्बा गुरुंग, पूर्व गृह मंत्री रमेश लेखक और पूर्व प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा के परिसरों को भी निशाना बनाया।
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