भारत की आध्यात्मिक परंपरा में कुछ पर्व ऐसे होते हैं, जिनका इंतजार भक्त पूरे वर्ष करते हैं। महाशिवरात्रि उन्हीं पावन पर्वों में से एक है। यह केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि आस्था, तप, संयम और आत्मिक शुद्धि का विशेष अवसर माना जाता है। वर्ष 2026 में यह पावन पर्व …
Read More »रक्तदान करने वालों को ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग में मिलेगा वीआईपी दर्शन: प्रशासन की प्रेरक पहल
मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में स्थित पवित्र ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग से एक प्रेरणादायक और तथ्य-आधारित खबर सामने आई है। जिला प्रशासन ने रक्तदान को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक नई योजना की घोषणा की है, जिसके तहत रक्तदान करने वाले श्रद्धालुओं को मंदिर में वीआईपी दर्शन की सुविधा दी …
Read More »कलियुग में धर्म का जीवंत स्वरूप: भगवान श्री जगन्नाथ पुरी की महिमा
कलियुग के सबसे बड़े धाम – भगवान श्री जगन्नाथ पुरी भारत की आध्यात्मिक परंपरा सहस्राब्दियों पुरानी है। सतयुग, त्रेतायुग और द्वापरयुग के बाद जब कलियुग का आरंभ हुआ, तब मानव जीवन में भक्ति के स्वरूप में भी परिवर्तन आया। जहाँ पहले कठोर तप, यज्ञ और दीर्घ साधनाएँ आवश्यक मानी जाती …
Read More »आध्यात्म क्या है? धर्म और अध्यात्म में मूल अंतर
अध्यात्म क्या है? धर्म और अध्यात्म में वास्तविक अंतर की सरल व्याख्या अध्यात्म और धर्म दोनों ही मानव जीवन के महत्वपूर्ण पक्ष हैं, लेकिन उनके स्वरूप और उद्देश्य में स्पष्ट अंतर है। धर्म एक सामाजिक और सांस्कृतिक व्यवस्था है, जो मनुष्य को नैतिकता, अनुशासन और कर्तव्य का बोध कराती है। …
Read More »कनाग माता मंदिर, ठियोग – पारम्परिक और समृद्ध देव संस्कृति का प्रतीक
कनाग देवी मंदिर: ठियोग की दिव्य आस्था और प्राकृतिक सौंदर्य हिमाचल प्रदेश देवभूमि के नाम से प्रसिद्ध है। यहाँ हर गाँव और हर घाटी में देवी-देवताओं का वास माना जाता है। शिमला ज़िले की ठियोग तहसील में स्थित कनाग माता मंदिर एक ऐसा ही पवित्र स्थल है। यह स्थल प्राकृतिक …
Read More »माँ दुर्गा के नौ रूप और उनका महत्व
माँ दुर्गा के नौ रूप और उनका महत्व भारत की आध्यात्मिक परंपरा में माँ दुर्गा शक्ति, करुणा और साहस की प्रतीक मानी जाती हैं। नवरात्रि के पावन अवसर पर माँ के नौ स्वरूपों की आराधना की जाती है। यह नौ दिन केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि जीवन के लिए गहन …
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