जब भी भगवान जगन्नाथ की नगरी पुरी का नाम लिया जाता है, मन में सबसे पहले भव्य रथयात्रा, अथाह आस्था और सदियों पुरानी परंपराओं की छवि उभरती है। लेकिन इस पवित्र धाम से जुड़ी एक ऐसी कहानी भी है, जो इसे और अधिक रहस्यमयी और रोचक बना देती है। जगन्नाथ मंदिर परिसर में लगी एक विशेष घंटी को लोग “फ्रेंच घंटी” के नाम से जानते हैं। कहा जाता है कि इस घंटी का संबंध भारत से नहीं, बल्कि हजारों किलोमीटर दूर फ्रांस से जुड़ा हुआ है।
यह कथा केवल एक विदेशी घंटी के मंदिर तक पहुंचने की नहीं, बल्कि आस्था, संकट, समुद्री यात्रा और भगवान जगन्नाथ के प्रति विश्वास की अनोखी दास्तान भी मानी जाती है।
समुद्री तूफान और एक मन्नत की कहानी
लोककथाओं के अनुसार, 18वीं शताब्दी के दौरान फ्रांस का एक बड़ा जहाज भारत की ओर आ रहा था। बताया जाता है कि यह जहाज पुडुचेरी बंदरगाह की दिशा में बढ़ रहा था और उसकी कमान कैप्टन अलबेक बिटो के हाथों में थी। जहाज पर कई कीमती सामान मौजूद थे, जिनमें एक बड़ी घंटी भी शामिल थी। माना जाता है कि यह घंटी मूल रूप से किसी चर्च में लगाई जानी थी।
यात्रा के बीच अचानक समुद्र का मौसम बेहद खराब हो गया। तेज हवाओं और ऊंची लहरों ने जहाज को घेर लिया। हालात इतने बिगड़ गए कि जहाज के डूबने का खतरा मंडराने लगा। जहाज पर मौजूद लोग घबराहट और भय में डूब गए। उसी दौरान वहां मौजूद एक उड़िया नाविक ने भगवान जगन्नाथ का स्मरण करने की सलाह दी। वह प्रभु का गहरा भक्त था और उसका विश्वास था कि संकट की घड़ी में जगन्नाथ अपने भक्तों की रक्षा अवश्य करते हैं।
कप्तान ने किया संकल्प
कहानी के मुताबिक, उस नाविक की बात सुनकर कप्तान ने भी भगवान जगन्नाथ से प्रार्थना की। उन्होंने मन ही मन संकल्प लिया कि यदि जहाज इस भयंकर समुद्री संकट से सुरक्षित निकल गया, तो जहाज पर रखी बड़ी घंटी को भगवान जगन्नाथ को अर्पित कर दिया जाएगा।
मान्यता है कि कुछ समय बाद समुद्र का प्रकोप शांत होने लगा और जहाज बड़ी दुर्घटना से बच गया। इस घटना ने कप्तान को गहराई से प्रभावित किया। सुरक्षित यात्रा पूरी होने के बाद उन्होंने अपनी मन्नत निभाई और वह घंटी भगवान जगन्नाथ को समर्पित कर दी।
पुरी मंदिर में आज भी मौजूद है यह घंटी
कहा जाता है कि बाद में यही घंटी पुरी के जगन्नाथ मंदिर परिसर में स्थापित की गई और समय के साथ यह “फ्रेंच घंटी” के नाम से प्रसिद्ध हो गई। श्रद्धालुओं और इतिहास में रुचि रखने वाले लोगों के लिए यह घंटी आज भी आकर्षण का विषय बनी हुई है। इसे केवल धातु की बनी एक वस्तु नहीं, बल्कि विश्वास और समर्पण की प्रतीक धरोहर के रूप में देखा जाता है।
आस्था और इतिहास का अनोखा संगम
पुरी धाम की यह कहानी इस बात को भी रेखांकित करती है कि भगवान जगन्नाथ की महिमा केवल भारत की सीमाओं तक सीमित नहीं रही। समुद्र पार से आए लोगों और यात्रियों के मन में भी इस धाम के प्रति श्रद्धा जागी और कई लोककथाएं समय के साथ इससे जुड़ती चली गईं। फ्रांस से जुड़ी यह घंटी उन्हीं कथाओं में से एक है, जो आज भी लोगों की जिज्ञासा बढ़ाती है।
जगन्नाथ पुरी की पहचान जहां एक ओर सनातन आस्था के विशाल केंद्र के रूप में है, वहीं दूसरी ओर ऐसी कथाएं इसे इतिहास, लोकविश्वास और सांस्कृतिक विरासत का भी अद्भुत केंद्र बना देती हैं।
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